महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में लड़की की शादी से पहले उसका बनवारा धूमधाम से निकाला गया। बनवारे की खास बात यह रही कि लड़की को लड़कों की तरह सफेद घोड़ी पर बैठाकर गांव में घुमाया गया। वहीं लड़की को तलवार भी भेंट की गई। घुड़चढ़ी के दौरान लड़की ने घोड़ी पर बैठकर तलवार लहराई लहराया। लड़की को झांसी की रानी का गेटअप भी दिया गया। जानकारी अनुसार, गांव डोहर में बीते कल बड़ी धूमधाम और परंपरागत रीतियों के साथ लड़की अमीषा की शादी संपन्न हुई। अमीषा MSC केमिस्ट्री की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि दूल्हा पोस्ट ग्रेजुएट है और वर्तमान में सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। बारात बुहाना तहसील के पाथरोली गांव से आई, जहां से दूल्हे के परिजन हर्षोल्लास के साथ डोहर पहुंचे। शादी से पूर्व निकाला गया बनवारा शादी में सबसे खास आकर्षण रहा बनवारा, जिसे गांव में विशेष सम्मान और उत्साह के साथ निकाला गया। अमीषा को घोड़ी पर बिठाकर डीजे की धुनों के साथ पूरे गांव में बनवारा घुमाया गया। परिजन, भाई, दोस्तों और गांववालों ने झूम-झूमकर नृत्य किया और अमीषा का स्वागत रानी की तरह किया। गो सेवक ने दी तलवार बनवारा निकालने के समय गोसेवक पंडित आनंद शास्त्री ने घोड़ी पर बैठी हुई लड़की को तलवार भेंट की। आनंद शास्त्री ने बताया कि अमीषा को तलवार भेंट कर उन्हें झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह दिखाया गया है। जो इस बनवारे का मुख्य आकर्षण रहा। नारी शक्ति को किया प्रोत्साहित उन्होंने कहा कि घोड़ी पर बैठी दुल्हन अमीषा को तलवार भेंट कर नारी शक्ति को प्रोत्साहित करने का उन्होंने संदेश दिया है। शास्त्री ने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें शक्ति और सम्मान दोनों प्रदान किए जाने चाहिए। वे घोड़ी पर बैठी पूरी झांसी वाली रानी लक्ष्मीबाई लग रही थी। भाई बोला- मेरी बहन लड़कों से पीछे क्यों रहे अमीषा को उनके बड़े भाई पंकज ने बनवारा दिया, जो स्वयं गाय सेवा से जुड़े हुए हैं। पंकज के साथ-साथ गांव डोहर के आनंद शास्त्री भी गौ सेवा से संबंध रखते हैं। आनंद शास्त्री शादी समारोह में लड़की के परिवार के पंडित के रूप में मौजूद थे। बनवारे में लड़की के पिता सज्जन सिंह व मां बबीता देवी भी रही। भाई ने कहा कि दोनों भाई बहन बड़े लाड़ के साथ पले हैं, अब बहन बनवारे में भी पीछे क्यों रहे। ढोल नगाड़ों पर नाचे लोग अमीषा का बनवारा निकलते समय गांव में उत्साह देखने लायक था। लोगों ने ढोल–नगाड़ों, डीजे और पारंपरिक वेशभूषा के साथ गांव का चक्कर लगाया। बेटी को घोड़ी पर बिठाकर तलवार थमाने की इस अनोखी परंपरा ने न केवल कार्यक्रम को भव्य बनाया बल्कि समाज में महिला सम्मान और सामर्थ्य का संदेश भी दिया।


