रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड स्थित गोविंदपुर गांव के बासदैव गंझु ने अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान मजदूरी छूट जाने के बाद उन्होंने यह पहल की, जिससे वह आज पूरे प्रखंड के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। बासदैव गंझु की मजदूरी छूट जाने के कारण उनके और उनके परिवार के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया था। अपने बच्चों को भूख से तड़पता देख बासदैव ने अपने पूर्वजों की बंजर पड़ी जमीन पर कुदाल लेकर काम करने का फैसला किया। बंजर जमीन को खेती योग्य बनाना शुरू किया शुरुआती दौर में उन्होंने एक एकड़ जमीन पर ताजी सब्जियां उगाकर परिवार का पेट भरा। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से बंजर जमीन को खेती योग्य बनाना शुरू किया। आज उनकी लगभग दस एकड़ बंजर जमीन हरी-भरी सब्जियों से लहलहा रही है। बासदैव गंझु अब इस खेत से बैंगन, टमाटर, गोभी, मिर्च, खीरा, करेला सहित कई अन्य हरी सब्जियां उगा रहे हैं। इससे उन्हें सालाना पांच से छह लाख रुपए की आय हो रही है, जिससे वह अपने परिवार के सपनों को साकार कर पा रहे हैं। बासदैव का कहना है कि यदि सरकार उन्हें कुछ सहयोग प्रदान करे, तो वह अपने पूर्वजों की दस-बीस एकड़ और बंजर जमीन को खेती योग्य बनाकर अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ा सकते हैं।


