बांसवाड़ा में 3 राज्यों से पहुंचे कलाकार:भारत माता मंदिर परिसर में आयोजन, आसपास जिलों के संत भी आए

गीता जयंती महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को भारत माता मंदिर पर 3 राज्यों के 1200 से अधिक कलाकारों का संगम जुटा। यहां अलग-अलग स्थानों से आई भजन मंडलियां शोभा यात्रा के साथ भारत माता मंदिर परिसर पहुंची। इसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों को बजाते बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, झालावाड़ के अलावा मध्यप्रदेश और गुजरात की भजन मंडलियां शामिल थीं। शोभायात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। दूसरे दिन गायत्री परिवार की ओर से आयोजित यज्ञ में शहरवासियों ने आहुतियां दी। परियोजना प्रमुख ने परियोजना की गतिविधियों की जानकारी दी। परियोजना की ओर से संचालित 192 विद्यालयों के वार्षिकोत्सव में बालक-बालिकाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इसमें विद्यार्थियों के कच्छी घोड़ी, शिव तांडव और गैर नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। आंबापुरा विद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति भी मुख्य आकर्षक का केंद्र थी। इसके अलावा लोक वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन, लोकगीत के बाद अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार नरेंद्र ने भवाई नृत्य प्रस्तुत किया। आज भी हम आरती के बाद विश्व का कल्याण हो, बोलते हैं… शाम को मंदिर परिसर स्थित पांडाल में संतों के प्रवचन हुए। इसमें मुख्य वक्ता संघ के अखिल भारतीय मंत्री उमाशंकर शर्मा थे। उन्होंने कहा कि हमारा धर्म विश्व में श्रेष्ठ है। हम आरती के बाद आज भी विश्व का कल्याण हो बोलते हैं। यह हमारी संस्कृति की पहचान है। दलसुख दास महाराज ने कहा आज सतगुरु के बताए मार्ग पर चलने से समग्र भक्ति की अलख दिखाई दे रही है। कमलगिरि महाराज ने धर्मांतरण को सबसे बड़ा पाप बताया। वहीं विक्रम दास महाराज ने सामाजिक सद्भावना को जीवन का मूल मंत्र बताया। संत रामप्रकाश महाराज, रामस्वरूप महाराज, रामगिरी महाराज, नरसिंग गिरी महाराज, फूलगिरी महाराज ने भी प्रवचन दिया। बालू दास महाराज, थावर गिरी महाराज, रतनगिरी महाराज, नारायण गिरी महाराज, नाथूराम महाराज, पवनपुरी महाराज, थावर गिरी महाराज, ईश्वर दास महाराज, केसरबाई, जगदीशपुरी महाराज, सतीश गिरी महाराज लाल शंकर पारगी, अशोक परमार, कमलेश महाराज, मोनी महाराज, बीड माताजी थांदला, शिव लहरी, मन फूल सिंह और जीजीटीयू के कुलगुरु केशव सिंह ठाकुर उपस्थित थे। देर रात तक भजन मंडलियों ने भजन कीर्तन किया। संचालन जगदीश चावड़ा, मुकेश चरपोटा और प्रेमशंकर कटारा ने किया। जानकारी प्रचार प्रभारी यशवंत भावसार ने दी।

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