चिकित्सा विभाग के दो अफसरों का विवाद शनिवार को एक बार सुर्खियों में आ गया। सीएमएचओ डॉ. शंकर एच बामणिया और आरसीएचओ डॉ. अशोक आदित्य आमने-सामने दिखे। शुरुआत सीएमएचओ बामणिया की ओर से हुई। उन्होंने खबरनुमा अंदाज में एक टेक्स्ट मैसेज मीडियाकर्मियों सहित अन्य ग्रुपों में भेजा, साथ में आदित्य का फोटो भी था। इसमें कहा गया था कि सीएमएचओ डॉ. बामनिया ने 13.19 लाख रुपए के अनियमित भुगतान व गबन मामले में आरसीएचओ आदित्य को फिर से नोटिस जारी किया है। उन्हें 13.19 लाख रुपए अगले 15 दिन में राजकोष में जमा कराने को भी कहा है। इसके बाद राशि उनके वेतन से काटी जाएगी। मैसेज दिनभर वायरल होता रहा। दूसरी ओर, आरसीएचओ आदित्य ने आरोप लगाया कि ये मुझे बदनाम करने की कोशिश है। मेरे पास तो कोई नोटिस आया ही नहीं। मैं लीगल एक्शन लूंगा बामणिया- नोटिस तो आदित्य को भेज चुका, मेरे पास नहीं
सीएमएचओ बामणिया से जब भास्कर ने कहा कि ये तो टेक्स्ट मैसेज है। वे बोले- नोटिस शुक्रवार को निकाला और डॉ. आदित्य को भिजवा दिया। 6 अफसरों में से सिर्फ आदित्य को नोटिस देने के सवाल पर वे बोले- 3 लोगों ने भुगतान कर दिया है। बचे हुए लोगों को जांच के बाद नोटिस देंगे। हालांकि, वे ये नहीं बता पाए कि किन 3 कर्मचारियों ने पैसे जमा करा दिए। आदित्य- मुझे तो नोटिस मिला ही नहीं, मीडिया भी पूछ रहा
आरसीएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने कहा कि मुझे नोटिस मिला नहीं। मीडिया के जरिए जानकारी मिली। बामणिया मुझे बदनाम करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। लीगल एक्शन लूंगा। जिस मामले में वे गबन का आरोप लगा रहे हैं, उसमें मेरे खिलाफ पहले भी रिकवरी का नोटिस आया था। तबसे मैं विभाग से मेमो मांग रहा हूं, लेकिन आज तक नहीं दिया गया। दोनों एक ही सीएमएचओ पद पर पांच माह तक जमे रहे थे
सरकार ने गत वर्ष मार्च में बामणिया की जगह आदित्य को सीएमएचओ बनाया। एक हफ्ते में बामणिया कोर्ट से स्टे ले आए। फिर करीब 5 माह तक दोनों ही सीएमएचओ पद पर जमे रहे। अगस्त में सरकार ने आदेश वापस ले लिए और आदित्य को फिर से आरसीएचओ बना दिया। इसके बाद से बामणिया सीएमएचओ हैं। पद से हटाने-बिठाने की यही लड़ाई सार्वजनिक होती रहती है। आदित्य सहित 6 आरोपी, पहले भी मिल चुका नोटिस
कोर्ट से स्टे लाने के बाद गत वर्ष अप्रैल माह पहले सप्ताह में आदित्य समेत 6 लोगों के खिलाफ गबन मामले में नोटिस निकाला गया था। इनमें पूर्व सीएमएचओ दिनेश खराड़ी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी आशीष डामोर, डॉक्टर अंजना मीणा, फार्मासिस्ट दीपिका राणावत व फार्मासिस्ट प्रेरणा पुजारी भी शामिल थे। ये मामला अप्रैल 2020 से मार्च 2023 के बीच हुई ऑडिट का था। इसमें अनियमित भुगतान एवं गबन के आरोप थे। उस समय भी सभी से अलग-अलग राशि जमा कराने को कहा गया था।


