भास्कर संवाददाता | पाली एक साल में हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) 27 पॉइंट सुधरने के बावजूद पाली शहर की हवा हानिकारक श्रेणी से बाहर नहीं आ पाई है। वर्ष 2023 में विश्व स्तरीय रैंकिंग में 131 एवरेज एक्यूआई के साथ 41वां सबसे प्रदूषित शहर था। इस साल एवरेज एक्यूआई 104 पहुंच कर विश्व की रैंकिंग में 117वां सबसे प्रदूषित शहर हैं। पिछले 12 महीने के एवरेज एक्यूआई में शहर ऑरेंज कैटेगरी में आ चुका है। ऑरेंज कैटेगरी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक श्रेणी में मानी जाती है। वर्ष 2024 में 26 दिसंबर को प्रदूषण का स्तर 193 एक्यूआई था। वर्ष 2023 में 20 नवंबर को हवा सबसे अधिक प्रदूषित होकर 245 एक्यूआई तक पहुंच गई थी। डॉक्टर का कहना है कि जब हवा 245 एक्यूआई तक पहुंच जाती है तो लोगों को कैंसर और लंग्स खराब की आशंका बढ़ जाती है। मास्क लगाने की जरूरत पड़ने लगती है। फैक्ट्रियों के बॉयलर और सड़कें सुधर जाए तो आबोहवा की स्थिति और सुधर सकते हैं। इस बीच भीलवाड़ा में 6 और सबसे प्रदूषित रहने वाले भिवाड़ी में भी 9 एक्यूआई का सुधार हुआ है। जोधपुर प्रदूषण में सुधार नहीं हुआ है। इधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ राहुल शर्मा की माने तो सड़कें ठीक होने और बॉयलर की समय-समय पर मॉनिटरिंग कर उद्यमियों को पाबंद करने से भी एक्यूआई में सुधार हुआ है। एक्सपर्ट बोले- 200 एक्यूआई में सिकुड़ जाती है सांस नली ^ एक्यूआई 200 से ऊपर जाने पर सांस नली में सिकुड़न पैदा होने लगती है। अस्थमा ब्रोंकाइटिस एवं सीओपीडी हो सकती है। आंख, नाक और गले में जलन हो सकती है। सिर दर्द के साथ चक्कर और स्ट्रोक हो सकता है। हार्ट की धमनियों में ब्लड की सप्लाई कम हो जाती है। 101 से 150 एक्यूआई में, पहले से बीमार को स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे मरीज के लिए दवा भी बेअसर होने लगती है। – डॉ. लक्ष्मण सोनी, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी


