अब कोई भी प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले नगर निगम भूमि का आवंटन अपने नाम से कराएगा। बिना भूमि आवंटन के प्रोजेक्ट शुरू करने और बाद में इस पर किसी तरह की आपत्ति या विवाद होने पर संबंधित इंजीनियर की जिम्मेदारी होगी। यह आदेश नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण की ओर से जारी किए गए हैं। इसके पीछे निगम प्रशासन की मंशा प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान या निर्माण के बाद बिक्री के समय खड़े होने वाले विवादों से बचना है। दरअसल, नगर निगम के पिछले कुछ प्रोजेक्ट ऐसी ही वजह के कारण मुसीबत में पड़ गए हैं। निगम की ओर से बनाई गई दुकानों के साथ ही कुछ कॉम्प्लेक्स में भी जमीन आदि से जुड़े विवाद सामने आए। यही नहीं रेरा की ओर से अनुमति नहीं मिलने के कारण भी दुकान आदि की बिक्री नहीं हो पा रही है। यही वजह है कि प्रॉपर्टी तैयार होने के बाद भी निगम उसे बेच नहीं पा रहा है। पिछले दिनों निगम कमिश्नर की ओर से इन प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई। इस दौरान पाया गया कि प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले अगर जरूरी प्रक्रिया का पालन किया गया होता तो यह नौबत ही नहीं आती। ‘सब चलता है’ की प्रवृत्ति पड़ रही भारी… निगम सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ सालों में नगर निगम की ओर से शुरू किए गए कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में जमीन के आवंटन संबंधी प्रक्रिया को पूरा करने से पहले ही प्रोजेक्ट शुरू किए गए। इस दौरान जिम्मेदारों का रवैया सब चलता है वाला रहा। यही वजह है कि आज कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो तैयार तो हैं लेकिन इनकी बिक्री पर रोक लगी हुई है। विवाद होने पर संबंधित अधिकारी होगा जिम्मेदार
^किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले यह देखना होगा कि वह जमीन निगम के अधिपत्य में हो। ताकि निर्माण के बाद विवाद खड़ा नहीं हो। इसकी जिम्मेदारी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की होगी।
-हरेंद्र नारायण, कमिश्नर, नगर निगम


