इंदौर के एक व्यक्ति की मौत के बाद उनकी कार आरटीओ विभाग से दूसरे के नाम पर ट्रांसफर हो गई। परिवार ने जब इसकी जानकारी निकाली तो वे भी चौंक गए। फिर उन्होंने कई जगह मामले की शिकायत की, लेकिन अभी तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है। मंगल नगर में रहने वाले कैटरिंग कारोबारी संतोष मालवीय ने 2014-15 में एक कार खरीदी थी। संतोष ने कार पर लोन भी लिया था। इसके बाद उन्होंने 2019 में टॉपअप ले लिया। संतोष की पत्नी मीरा मालवीय के अनुसार वे किश्त भी भर रहे थे। जुलाई 2021 में संतोष की मौत हो गई। मौत के बाद उनका इश्योरेंस क्लेम आया। लोन कंपनी ने उनसे कहा कि क्लेम का पूरा पैसा हमें दे दो। सेटलमेंट के बाद जो अमाउंट बचेगा वह परिवार को वापस कर दिया जाएगा। संतोष की पत्नी ने आरोप लगाया कि वह चेक लेकर कंपनी में गई, लेकिन उन्हें वहां कोई लोन खत्म करने के डॉक्यूमेंट नहीं दे रहे थे। इस कारण उन्होंने चेक उन्हें नहीं दिया। इसके कुछ समय बाद कंपनी वाले उनके घर आए और लोन जमा करने के लिए कहने लगे। बाद में 2023 में उनका बेटा कार से निपानिया स्थित होटल गया, जहां उससे कार छीन ली गई। इसकी शिकायत उन्होंने लसूड़िया थाने में की, तो कंपनी वालों ने कार के बदले में शिकायत वापस लेने को कहा। परिवार ने शिकायत वापस भी ले ली, लेकिन कंपनी ले गाड़ी नहीं दी। बाद में कंपनी वाले गाड़ी के बदले 5 लाख रुपए की डिमांड करने लगे। उज्जैन ट्रांसफर कर दी गाड़ी मीरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि थोड़े दिन बाद उन्हें पता चला कि उनकी कार तो उज्जैन ट्रांसफर हो गई। परिवार को ये समझ नहीं आया कि जब कार उनके पति के नाम पर थी, तो बिना उनके डेथ सटिर्फिकेट, बिना नॉमिनी के साइन के इंदौर आरटीओ से कार कैसे ट्रांसफर हो गए। इंदौर आरटीओ ने हमें पूरी जानकारी भी नहीं दी थी। महिला ने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी करके मृत व्यक्ति की गाड़ी को कैसे ट्रांसफर कर दिया गया। गाड़ी का ओरिजनल आरसी कार्ड भी हमारे पास है और लोन भी अभी तक हमारे नाम से ही चल रहा है। उन्होंने बताया कि गाड़ी की किश्त भी अभी नहीं भर रहे हैं। क्योंकि गाड़ी अभी तक उन्हें नहीं मिली है। इस मामले में उन्होंने तिलक नगर थाने में कुछ महीने पहले ही शिकायत की है। महिला का कहना है कि आज मेरे साथ गलत हुआ है, कल को किसी के साथ भी गलत हो सकता है। शिकायत में महिला ने बताया कि उनके मृत पति की गाड़ी को 20 जून 2022 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी साजिद पटेल के नाम ट्रांसफर कर दी गई। इसमें फर्जी एनओसी और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करने का आरोप भी उन्होंने लगाया है। महिला ने आरोप लगाया है कि ये काम कंपनी के कर्मचारियों, आरटीओ एजेंटों और विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया है। मामला जांच में है तिलक नगर टीआई मनीष लोधा ने बताया कि मामला जांच में है। शिकायतकर्ता को भी आरटीओ से नामांतरण खारिज करने की समझाइश दी गई थी। आरटीओ में किस आधार पर नामांतरण किया गया है ये देखना पड़ेगा।


