राजगढ़ जिले में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा का ‘संवाद से समाधान’ कार्यक्रम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण में प्रभावी साबित हो रहा है। मंगलवार को आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सात शिकायतों की समीक्षा की गई, जिनमें भुगतान में देरी और मुआवजा रोकने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कलेक्टर ने प्रत्येक मामले को व्यक्तिगत रूप से सुनकर मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए। नरसिंहगढ़ से आई एक शिकायत में बाबूराम वर्मा ने बताया कि हितग्राही कन्या बाई का नसबंदी ऑपरेशन जून 2024 में हुआ था, लेकिन उन्हें 30,000 रुपए की सहायता राशि अब तक नहीं मिली है। इस पर कलेक्टर ने बीपीएम राजेश कुमार यादव और बीई नरसिंहगढ़ के वेतन से राशि वसूल कर सात दिन के भीतर भुगतान करने के निर्देश सीबीएमओ को दिए। साथ ही, शिकायत की निगरानी न करने पर सीबीएमओ के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए। पप्पू तंवर ने शिकायत की कि उनकी पत्नी सुनीता तंवर को 12 अक्टूबर 2024 को डिलीवरी के बाद मिलने वाली 10,600 रुपए की प्रसूति सहायता राशि अटकी हुई है। कलेक्टर ने बीपीएम रामबाबू दांगी और लेखापाल मनोज जाटव को सात दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि देरी होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वाहिद खान की पत्नी सबा खान की प्रसूति राशि न मिलने के मामले में एएनएम रानू चौरसिया की गंभीर लापरवाही सामने आई। उन्होंने हितग्राही की समग्र आईडी गलत दर्ज कर दी थी। कलेक्टर ने एएनएम की संविदा समाप्त करने के निर्देश देते हुए दो दिन में भुगतान कराने को कहा। सारंगपुर के अमिन खान के प्रकरण में बीपीएम देवेंद्र वर्मा और कर्मचारी जगदीश दांगी द्वारा प्रसूति राशि के भुगतान में लापरवाही की पुष्टि हुई। कलेक्टर ने दोनों का सात दिन का वेतन काटने और एनएचएम एमडी को जांच के लिए पत्र भेजने के आदेश दिए। खलील कुरैशी ने बताया कि उनकी बेटी, नर्स शाहिस्ता कुरैशी को चार माह का जीवन निर्वाह भत्ता नहीं मिला है। जांच में लेखापाल दिनेश पारिक की गलती उजागर हुई, जिस पर कलेक्टर ने उनकी एक वेतन वृद्धि रोकने और तीन दिन के भीतर भुगतान कराने के निर्देश दिए।


