मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सेवानिवृत्त कलेक्टर अशोक कुमार वर्मा के आचरण पर कड़ी निंदा व्यक्त की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि उनकी व्यक्तिगत सेवा रिकॉर्ड में यह टिप्पणी और जांच रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। इस आदेश से वर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद की नियुक्तियों पर सीधा असर पड़ेगा। मामले में दोषी पाए गए चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी चार महीने के भीतर विभागीय जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मामला लश्कर क्षेत्र की 5.19 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जो पटवारी हल्का 61 में आती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 5.30 बीघा जमीन का फैसला योगेश शर्मा व अन्य के पक्ष में दिया था।इसके खिलाफ शासन की अतिरिक्त सत्र न्यायालय में दायर अपील 2003 में खारिज हो गई। इसके बाद 2006 में हाईकोर्ट में द्वितीय अपील दायर की गई, लेकिन डिफॉल्ट दूर न होने के कारण वह भी खारिज हो गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होगी। देरी और लापरवाही सामने आई 3277 दिनों की देरी से अपील को पुनः सुनवाई में लाने के लिए याचिका दायर की गई। कोर्ट ने केस प्रभारी पर कार्रवाई के लिए पूछा जिस पर तत्कालीन कलेक्टर अशोक वर्मा ने 12 अधिकारियों को जिम्मेदार बताया था। लेकिन 2018 के बाद से यह सुनवाई में नहीं आई और कलेक्ट्रेट से केस की फाइल भी गायब पाई गई। इन अनियमितताओं के चलते कोर्ट ने तत्कालीन कलेक्टर के आचरण की जांच के आदेश दिए। भविष्य के लिए अलर्ट


