बैतूल के चिचोली रेंज के रातामाटी खुर्द गांव के गन्ना खेतों में टाइगर की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग ने तत्काल सर्चिंग शुरू कर दी है। पश्चिम वन मंडल के डीएफओ के निर्देश पर तीन टीमें गठित कर तलाशी अभियान चला रही हैं। ग्रामीणों ने तीन दिन पहले रविवार रात टाइगर की हलचल देखी थी, जिसकी जानकारी चिचोली रेंज कार्यालय और डीएफओ को दी गई। मौके पर पहुंची टीम को किसान राजेश यादव के गन्ना खेत में टाइगर के स्पष्ट पगमार्क मिले हैं। इसके बाद सोमवार और मंगलवार को भी संभावित क्षेत्रों में सर्चिंग जारी रही। गन्ने के खेत में मिले टाइगर के पगमार्क
वन विभाग ने रातामाटी खुर्द और आसपास के गांवों में मुनादी कर ग्रामीणों को रात में खेतों में न जाने की सलाह दी है। हालांकि, रात में सिंचाई के लिए खेतों में जाना किसानों की मजबूरी है, जिससे उनमें सतर्कता बनी हुई है। राजेश यादव ने बताया कि उनके गन्ने के खेत में अभी भी टाइगर मौजूद है। जानकारों के अनुसार, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र से हर साल नवंबर-दिसंबर में टाइगर का मूवमेंट देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टाइगर ने किसी जानवर का शिकार किया होता, तो वह लंबे समय तक उसी क्षेत्र में रहता, अन्यथा वह आगे बढ़ जाता है। अभी तक किसी शिकार की सूचना नहीं मिली है। वन विभाग की टीमें कर रही हैं सर्चिंग
डीएफओ एल.के वासनिक ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर तीन टीमों को चौबीसों घंटे निगरानी के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं, तो सुबह अन्य टीमों से भी सर्चिंग करवाई जाएगी। टाइगर आमतौर पर 24 घंटे एक ही स्थान पर नहीं रहता। फिलहाल रातामाटी खुर्द और आसपास के गांवों में टाइगर की मौजूदगी से ग्रामीण सतर्क हैं और वन विभाग की टीमें लगातार सर्च अभियान चला रही हैं।चिचोली रेंजर शैलेन्द्र चौरसिया ने बताया कि वन्य प्राणी के पगमार्क देखने से लग रहा है कि टाइगर है। स्टाफ की ड्यूटी लगा दी है। जिस रूट से जाने की संभावना है। वहां निगरानी कर रहे है। ट्रैप कैमरे में फिलहाल नजर नहीं आया है। सम्भव है वह आगे बढ़ गया होगा।फिर भी निगरानी की जा रही है। देखें तस्वीर


