किसानों को यूरिया खाद के लिए लंबी कतारे और खाद की मारामारी को लेकर कृषि विभाग अब टोकन सिस्टम लेकर आया और कहा कि जिसको टोकन मिला वो लाइन में नहीं होगा तब भी उसको खाद मिलेगा। यहीं नहीं उदयपुर जिले में अधिक यूरिया खाद बेचने वाले से लेकर बार-बार खरीद कर कालाबाजारी करने वालों पर नजर रहेगी। जरूरत होने पर ऐसे लोगों के खिलाफ FIR भी कराई जाएगी। विभाग का कहना है कि दो महीने में अनियमितता की शिकायत पर 15 लाइसेंस सस्पेंड किए है। असल में यूरिया को लेकर जैसे ही गाड़ी गांव में पहुंचती है और किसानों की लाइन लग जाती हैं किसान इस मारामारी में पूरा दिन खाद के लिए निकाल देता है और अंत में खाद हाथ नहीं लगता तो निराश होकर लौटता है। मावली के पलाना और थामला क्षेत्र में घंटों लाइन के बाद कुछ किसान निराश लौटे तो कहीं अभी यूरिया की सप्लाई नहीं हुई तो किसान इंतजार ही कर रहे है। इसके बाद विभाग ने अधिक भीड़ होने पर टोकन प्रणाली लागू की है। इसमें उपलब्ध मात्रा के अनुरूप किसानों को प्राथमिकता से टोकन दिए जा रहे है। एक समय में 20 से अधिक किसानों की उपस्थिति नहीं रहे, यह सुनिश्चित किया गया। इधर विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल ने सभी प्रदेश के सभी कृषि अधिकारियों को उर्वरक वितरण के उचित प्रबंधन, निगरानी और शिकायत निवारण को लेकर जारी कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सीमावर्ती राज्यों से सटे इलाकों में स्थापित चेकपोस्ट और बैंक पोस्ट के माध्यम से कड़ी निगरानी रखने के लिए भी पाबंद किया गया है, ताकि जमाखोरी, कालाबाजारी, टैगिंग, अवैध भंडारण, परिगमन तथा अनुदानित उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग को रोका जा सके। इसी क्रम में उदयपुर में 6 चेक पोस्ट लगाई गई है। उदयपुर के कृषि (विस्तार) संयुक्त निदेशक सुधीर कुमार वर्मा ने बातया कि यूरिया की कालाबाजारी, जमाखोरी रोकने के लिए हमने तमाम प्रयास कर रखे है और हमारी नीचे की टीम हर जगह मौजूद रहती है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में चेक पोस्ट स्थापित की गई है ताकि यहां से दूसरे राज्यों में ले जाकर कालाबाजारी कोई करने का प्रयास करता है तो उसे वहां पकड़ लिया जाएगा। वर्मा कहते है कि हमने सभी उर्वरक विक्रय केंद्रों पर मूल्य सूची, प्राधिकार पत्र और उपलब्ध स्टॉक का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक कार्यालय में स्थापित उर्वरक कंट्रोल रूम को और सक्रिय करते हुए, किसान कॉल सेंटर एवं सीधे प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण कर उसका रिकॉर्ड संधारित करने के आदेश दिए गए हैं। अधिक व बार-बार खरीदने वालों पर नजर
आईएफएमएस पोर्टल के माध्यम से यूरिया के टॉप खरीददार, बार-बार के खरीददार तथा अधिक यूरिया बिक्री करने वाले रिटेलर चिन्हित कर उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। साथ ही की गई कार्रवाई को पोर्टल पर अपलोड भी किया जाएगा। जानिए उदयपुर की बुवाई की जानकारी
उदयपुर जिले में रबी 2025-26 दौरान गेहूं, चना, जौ, सरसों आदि फसलों का बुवाई रकबा 1,38,000 हैक्टेयर है। रबी मौसम की कुल मांग 27600 मैट्रिक टन (माह-अक्टूबर से फरवरी-2025) के विरूद्ध अब तक जिले में 14150 मैट्रिक टन की आपूर्ति हो चुकी है। इसके अतिरिक्त माह दिसंबर, 2025 के लिए 8900 मैट्रिक टन यूरिया की मांग मुख्यालय जयपुर भेज रखी है। किसान अनावश्यक उर्वरक का भंडारण ना करें
वर्मा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यूरिया का अनावश्यक उर्वरक का भंडारण ना करें। वर्तमान में अधिकांश स्थानों पर गेहूं फसल में प्रथम सिंचाई के साथ प्रथम यूरिया छिटकाव (टॉपड्रेस) का दौर चल रहा है। कृषक प्रथम छिटकाव की यूरिया मात्रा ही कय करें। 15 दिसंबर उपरांत द्वितीय सिंचाई के साथ द्वितीय यूरिया छिटकाव (टॉपड्रेस) के लिए आवश्यक मात्रा जिले में आपूर्ति हो जाऐगी। कंट्रोल रूम को करें शिकायत
उर्वरकों के उदयपुर जिले में आपूर्ति एवं व्यवस्थित विक्रय के लिए कार्यालय संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जिसके प्रभारी से संर्पक नंबर-7740804440 है। इस नंबर पर खाद से जुड़ी कोई कालाबाजारी या अन्य शिकायत है तो दर्ज करा सकते है। वर्मा ने बताया कि उदयपुर जिले में करीब दो महीने में 15 लाइसेंस सस्पेड किए तो 3 के निरस्त ही कर दिए है।


