राजस्थान हाईकोर्ट ने धौलपुर से कांग्रेस विधायक शोभारानी कुशवाह को राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर 8 साल पुराने क्रिमिनल केस को रद्द कर दिया हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह आदेश शोभारानी कुशवाह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिए। विधायक के खिलाफ साल 2017 में भरतपुर में धोखाधड़ी और साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने सह आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित मानते हुए चालान पेश किया। लेकिन कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2022 को शोभारानी कुशवाह के खिलाफ भी प्रसंज्ञान ले लिया। इस आदेश के खिलाफ दायर रिवीजन को भी एडीजे कोर्ट ने 12 मई 2023 को खारिज कर दिया। इन दोनों आदेशों को विधायक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विधायक कंपनी में मात्र शेयर-होल्डर
विधायक की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता माधव मित्र ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता महिला है और विपक्षी पार्टी की विधायक हैं। वह कंपनी में केवल शेयर होल्डर हैं। उसका कंपनी के दिन-प्रतिदिन के कामों से कोई लेना-देना नहीं है। जांच में भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जो याचिकाकर्ता को अपराध में शामिल करता हो। पंजाब और छत्तीसगढ़ में दर्ज केस में भी नाम नहीं
उन्होने बताया कि कंपनी के खिलाफ छत्तीसगढ़ और पंजाब में भी मामले दर्ज हुए थे। लेकिन किसी भी मामले में याचिकाकार्ता का नाम नाम नहीं था। उसके पास मात्र नौ हजार शेयर है। मामले में शिकायतकर्ता के साथ कंपनी का समझौता हो चुका है। मामले में एक आरोपी को 11 नवंबर 2024 को बरी किया जा चुका है। विवाद निवेशक और कंपनी के बीच पूरी तरह से निजी और सिविल नेचर का है। ऐसे में याचिकाकर्ता के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आपराधिक कार्रवाई जारी रहना कानून का दुरुपयोग होगा। कार्रवाई जारी रहना अनुचित
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पुलिस ने कोई चार्जशीट दायर नहीं की थी। वह मात्र एक शेयर होल्डर है ना कि मैनेजमेंट का हिस्सा। शिकायतकर्ता और कंपनी के बीच विवाद का निपटारा भी हो चुका है। मामले में सह आरोपी बरी हो चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ता के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई जारी रहना अनुचित है। मामला वैसे भी सिविल प्रकृति का है।


