एटीएस और एएनटीएफ की संयुक्त टीम ने चार साल से फरार चल रहे अन्तर्राज्यीय मादक पदार्थ तस्कर कैलाश चन्द खाती पटेल (52) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के ऊपर 25,000 रुपए का इनाम घोषित था। एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि एडीजी दिनेश एम.एन. के निर्देशन में यह बड़ी कार्रवाई पूरी हुई। कैलाश मूल रूप से नीमच जिले के अचलपुरा गांव का निवासी है और लंबे समय से राजस्थान–मध्यप्रदेश में डोडा–पोस्त और अफीम तस्करी का कुख्यात नाम रहा है। देशभर में माल सप्लाई कराने वाला बड़ा बिचौलिया था आरोपी कैलाश खुद न तो नशे की खेती करता था और न ही माल खुद ले जाता था। उसकी खासियत यह थी कि वह उत्पादन करने वालों और बड़े तस्करों के बीच बिचौलिया बनकर भारी रकम कमाता था। वह राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र, पंजाब से सटे जिलों और पंजाब तक नशे की सप्लाई करवाने वाला अहम किंगपिन माना जाता है। उसकी शातिर चालों के कारण वह 11 साल में सिर्फ चार मामलों में ही पुलिस के सामने उजागर हो पाया। छोटे पैकेटों में माल भेजकर पुलिस को देता था धोखा अन्य तस्करों की तरह कैलाश पूरी गाड़ी भरकर माल नहीं भेजता था। वह हर बार सिर्फ एक क्विंटल तक की खेप छोटे-छोटे थैलों में रखकर भेजता, जिससे गाड़ी में रखे घरेलू सामान के बीच नशा आसानी से छिप जाता। कई बार पुलिस की नजरों से उसकी गाड़ियां निकल भी जाती थीं, क्योंकि ऊपर से वे आम सामान से भरी लगती थीं। गहराई से सोचने वाला आरोपी—11 साल में चार मुकदमे ही लगे कैलाश ने 2014 में नशे का कारोबार शुरू किया और 11 साल में देशभर में नशा पहुंचाने के बावजूद उसके खिलाफ सिर्फ चार मामले दर्ज हो पाए। यह उसकी शातिर चालों का ही नतीजा था। वह हमेशा अपने ड्राइवरों और अन्य लोगों को आगे करता था और खुद सामने नहीं आता था। पकड़े गए ड्राइवर ही उसका नाम बताते थे, जिसके बाद वह फिर गायब हो जाता था। कमिशन खोरी का बड़ा खेल, अफीम उत्पादन में नहीं रखी हिस्सेदारी कैलाश जहां का रहने वाला है, वह इलाका अफीम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। फिर भी उसने कभी खुद खेती नहीं की। उसने सिर्फ जमाखोरी और बिचौलिया प्रणाली पर काम किया। अफीम उत्पादकों से वह छोटी मात्रा में माल इकट्ठा करता और बड़े तस्करों को मोटे कमीशन पर सप्लाई करवाता। उसकी शर्त होती कि एक क्विंटल से कम के सौदे में वह हिस्सा नहीं लेगा। एक डील में 40–50 हजार की कमाई कर लेता था एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि, कैलाश एक क्विंटल नशा दिलवाने पर प्रति किलो 400–500 रुपए कमीशन लेता था। यानी एक डील में ही वह 40 से 50 हजार रुपए कमा लेता था। महीने में चार डील होने पर उसकी कमाई 2 से 3 लाख रुपए तक पहुंच जाती थी। वह सिर्फ चार दिन काम करता और बाकी महीने ऐश करता था। खुद भी उसने पुलिस के सामने यही कबूला कि “चार दिन काम, बाकी आराम”। गांव के तस्करों के सम्पर्क में आया और अपराध की राह पकड़ ली कैलाश ने सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई की और बाद में खेती–बाड़ी व ड्राइविंग करने लगा। साल 2014 में उसका संपर्क गांव के बड़े डोडा-चूरा तस्करों से हुआ, जिसने उसकी दिशा बदल दी। शुरू में उसने छोटी-छोटी सप्लाई करवायी, लेकिन धीरे-धीरे बड़े सौदों का माध्यम बन गया। उसकी चालें देखकर गिरोह के बड़े लोग भी उसे महत्व देने लगे। ड्राइवर पकड़े जाते रहे, कैलाश हर बार बच निकलता गया 2019 में पहली बार जब उसके गांव के ही युवक लेखराज के साथ मिलकर की गई सप्लाई पकड़ी गई, तभी कैलाश पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके बाद भी कैलाश का खेल बंद नहीं हुआ। नीमच कंट पुलिस, सुहागपुरा थाना और जोधपुर लूणी थाना में उसकी तस्करी पकड़ी गई, लेकिन हर बार पकड़े गए लोग उसका नाम बताते और कैलाश फरार हो जाता। चार थानों में वांछित और 25 हजार का इनामी बन चुका था आरोपी राजसमंद, प्रतापगढ़, जोधपुर लूणी और नीमच जिले में कैलाश वांछित था। उसकी गिरफ्तारी पर 25,000 रुपए का इनाम घोषित किया गया था। एएनटीएफ के गठन के बाद चित्तौड़गढ़ यूनिट ने सप्लायर्स की जानकारी जुटानी शुरू की, तभी कैलाश का नाम सामने आया। टीम ने उसकी पूरी कुंडली खंगाली और पता लगाया कि वह खुद कभी सीधे सप्लाई नहीं ले जाता। वोटर लिस्ट के बहाने पुलिस ने पहुंच बनाई और दबोच लिया एएनटीएफ को सूचना मिली कि कैलाश राजनीति में दिलचस्पी रखता है और उसका नाम दो जगह वोटर लिस्ट में दर्ज है। इसी बहाने टीम ने खुद को एसआईआर की अधिकारी टीम बताकर कैलाश के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने बताया कि वह अगले दिन शाम 5 बजे घर के पास एक होटल पर आएगा। जैसे ही कैलाश वहां पहुंचा, टीम ने उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसने सारी बातें स्वीकार कर लीं। ऑपरेशन ‘धरातुंडिका’ के नाम से की गई कार्रवाई टीम ने इस ऑपरेशन को ‘धरातुंडिका’ नाम दिया। माउंट कैलाश को पृथ्वी का नाभिस्थल माना जाता है और नाभि के पर्यायवाची ‘तुंडिका’ और पृथ्वी के ‘धरा’ को जोड़कर यह नाम रखा गया। कैलाश जिस तरह नशे की सप्लाई का केन्द्र बना हुआ था, उसके अनुसार यह नाम बिल्कुल उपयुक्त माना गया। पूरा ऑपरेशन एएनटीएफ–एटीएस की संयुक्त रणनीति का परिणाम इस कार्रवाई में जयपुर मुख्यालय और चित्तौड़गढ़ एएनटीएफ की टीमों ने मिलकर काम किया। एटीएस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि ऑपरेशन में शामिल सभी जवानों को जल्द ही एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कैलाश की गिरफ्तारी से पुलिस को नशे के बड़े नेटवर्क के कई छोर पकड़ने में मदद मिलेगी।


