मंदसौर गांधीसागर अभयारण्य में विलुप्तप्राय कैराकल (साहगोश) की उपस्थिति के सबूत मिलने के बाद भारत सरकार और राज्य वन विभाग का एक उच्चस्तरीय दल दो दिवसीय निरीक्षण और अध्ययन के लिए अभयारण्य पहुंचा। वनमंडलाधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि 29 जून से 4 जुलाई 2025 के दौरान कैमरा ट्रैप के माध्यम से कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद 2 और 3 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव विशेषज्ञों और अधिकारियों का एक विशेष दल गांधीसागर पहुंचा। इस उच्चस्तरीय दल में ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) के जनरल सेक्रेटरी डॉ. राजेश गोपाल, वरिष्ठ सलाहकार डॉ. हिम्मतसिंह नेगी, मुख्य कार्यक्रम अधिकारी मोहनिश कपूर, कार्यक्रम प्रबंधक अमरनाथ चौधरी, एस्ट्रल फाउंडेशन के साहिल चौकसी, शुभरंजन सेन, तथा प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, भोपाल, एम.आर. बघेल और मुख्य वनसंरक्षक, वन वृत्त शामिल रहे। अभयारण्य में आयोजित बैठक में विशेषज्ञों के दल को कैराकल के संभावित आवास, गतिविधियों, कैमरा ट्रैप में कैद हुए साक्ष्यों, क्षेत्रीय जैव विविधता और वर्तमान परिस्थितियों पर प्रजेंटेशन दिया गया। इसके बाद दल ने गांधीसागर अभयारण्य के उस पूरे वन क्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया, जहां कैराकल की उपस्थिति के संकेत मिले थे। इस दौरान संभावित रहवास क्षेत्रों की निगरानी, कैमरा ट्रैप बिंदुओं की समीक्षा, जमीनी परिस्थितियों का अवलोकन और क्षेत्रीय पारिस्थितिकी का अध्ययन जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया। निरीक्षण के बाद कैराकल के संरक्षण के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई। इसमें वन्यप्राणी के संभावित आवास का वैज्ञानिक आकलन, निगरानी और कैमरा ट्रैपिंग का विस्तार, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, संरक्षण को दीर्घकालिक योजनाओं से जोड़ना, और अनुसंधान समेत सर्वेक्षण को मजबूत करना जैसे मुख्य बिंदु शामिल थे। उच्चस्तरीय दल ने गांधीसागर अभयारण्य में कैराकल की उपस्थिति को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना। उन्होंने इसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।


