आदर्श मधुकर राजकीय जनाना अस्पताल परिसर में आश्रय स्थल नगर निगम ने 16 अप्रैल 2008 को अस्पताल में भर्ती प्रसूता व बच्चों के परिजनों को ठहरने के लिए खोला था, जिससे उन्हें सर्दी, गर्मी व बरसात में कहीं परेशान न होना पड़े और अस्पताल में इधर-उधर रात में पड़े रहने वाले लोगों की अनावश्यक भीड़ न रहे। यहां कई साल तक महिला व पुरुष दोनों की अलग-अलग ठहरने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अब सिर्फ महिलाओं को ही आश्रय दिया जाता है। अस्पताल में प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के साथ आने वाले उनके पति व अन्य पुरुष अटेंडेंट को ठंड में न अस्पताल में रुकने दिया जाता है और न ही बाहर आश्रय स्थल में ठहरने दिया जाता है। खास बात ये है कि 24 घंटे या 7 दिन के लिए ठहरने की व्यवस्था वाला आश्रय स्थल साल व महीनों तक बाउंसर जलवती, श्री अन्नपूर्णा रसोई में खाना बनाने की नौकरी करने वाली श्रीमती व एएनएम की ट्रेनिंग करने वाली मिथलेश जैसी महिलाओं का ठिकाना बन गया है। यहां पुरुषों का ठहरना बंद कर दिया है और वह पूरी रात ठंड में ठिठुरते फिरते हैं। असल में अस्पताल में प्रसव के लिए डीग व भरतपुर जिले ही नहीं आस-पास के क्षेत्रों से भी गर्भवती महिलाएं आती हैं, उनके साथ पति व अन्य पुरुष भी आते हैं। अस्पताल में रात 10 बजे बाद भर्ती प्रसूताओं के वार्ड में पुरुषों को गार्ड बाहर निकाल देते हैं, क्योंकि वार्ड में महिलाएं भर्ती होती हैं और उनकी निजता का हनन होता है। दिखवाकर पुरुषों की मौसम को देखते हुए जल्दी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। नियम विरुद्ध रहने वालों के खिलाफ नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। कमर चौधरी, जिला कलेक्टर


