श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी मानव हितकारी संघ, विद्या भूमि राणावास के जय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में साध्वी काव्य लता ने संबोधित करते हुए कहा कि राणावास विद्या भूमि में शिक्षा के साथ-साथ जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। यहां आध्यात्मिकता के संस्कार गहराई से विकसित हो रहे हैं। साध्वी काव्य लता ने 1982 में राणावास में ही आचार्य तुलसी से दीक्षा लेकर आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। उन्होंने देशभर में अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान और मूल्य आधारित शिक्षा का संदेश देकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्था अध्यक्ष पी. मोहनलाल जैन ने साध्वी काव्य लता ठाणा-4 का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान निदेशक डॉ. जबर सिंह राजपुरोहित ने किया। उन्होंने कहा कि साध्वी श्री की मातृभूमि, शिक्षा भूमि और दीक्षा भूमि राणावास होना यहां के लिए गौरव की बात है। साध्वी मंडल का राणावास में मंगल प्रवेश : साध्वी काव्य लता के साथ साध्वी ज्योति प्रभा, साध्वी सुरभि प्रभा और साध्वी राहत प्रभा का मंगल प्रवेश हुआ। वहीं समणी जिन प्रज्ञा एवं समणी क्षांतिप्रज्ञा का प्रवास भी संस्थान में जारी है। कार्यक्रम में संस्था मंत्री सुनील बाफना, पदाधिकारी निर्मलचंद पोकरण बागड़ी, विमल गादिया, नेमीचंद जैन, नेपाल सिंह राठौड़, कुशाल जोशी, भावेश दवे, ओम सिंह राठौड़, अरुण प्रताप सिंह, डॉ. शिवदयाल देवड़ा, जयप्रकाश सहित विभिन्न इकाइयों के प्राचार्य, स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे। मांडा. राणावास बीएड कॉलेज में छात्रों को संबोधित करतीं साध्वी।


