जबलपुर संभाग के सबसे बड़े विश्वविद्यालय रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) की UICSA लैब चर्चा में है। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने विधानसभा में विभाग में कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों की जानकारी मांगी थी। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दावा किया कि सभी संसाधन उपलब्ध हैं और खरीद प्रक्रिया जारी है। लेकिन दैनिक भास्कर की पड़ताल में पाया गया कि लैब में कंप्यूटर बंद पड़े हैं, कोई सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं है और छात्रों को प्रैक्टिकल करने के लिए खुद लैपटॉप लाना पड़ता है। 200 से अधिक छात्र पढ़ाई के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाओं के बिना संघर्ष कर रहे हैं। विधानसभा में कांग्रेस विधायक ने उठाया मुद्दा विधानसभा में मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि एमसीए और बीसीए के लिए 25 कंप्यूटर उपलब्ध हैं और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया जारी है। लेकिन दैनिक भास्कर की टीम जब UICSA विभाग में गई, तो लैब में सन्नाटा था। छात्र बाहर घूम रहे थे, और कंप्यूटर केवल शोपीस के तौर पर रखे गए थे। खराब लैब और अधूरी पढ़ाई UICSA विभाग में 200 से अधिक छात्र हैं, लेकिन नियमित टीचर की जगह केवल अतिथि शिक्षकों पर पढ़ाई निर्भर है। एमसीए थर्ड सेमेस्टर के छात्र बताते हैं कि तीन सेमेस्टर से लैब बंद है और प्रैक्टिकल केवल अपने लैपटॉप से करना पड़ता है। छात्रों ने कई बार HOD और रजिस्ट्रार से शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। छात्रों का कहना है कि लैब में इंटरनेट सुविधा है, लेकिन कंप्यूटर बंद होने की वजह से इसका कोई फायदा नहीं। पुराने सिस्टम और एक्सपायर सॉफ्टवेयर की वजह से प्रैक्टिकल पूरी तरह संभव नहीं है। तकनीकी संसाधन पूरी तरह अनुपलब्ध एमसीए छात्र अनिकेत कुमार रेड्डी ने बताया कि लैब में 20-30 कंप्यूटर हैं, लेकिन सभी खराब हैं। बीते दो सालों में कोई भी सिस्टम चालू नहीं देखा गया। साफ्टवेयर एक्सपायर हो चुका है। कभी-कभी अगर कंप्यूटर चालू भी हो जाता है, तो कुछ ही मिनट में बंद हो जाता है। UICSA विभाग, जो 1993 में तकनीकी शिक्षा मजबूत करने के लिए स्थापित हुआ था, आज AICTE के मानकों का पालन नहीं कर रहा है। AICTE के नियमों के अनुसार स्नातक में 10 छात्रों पर 1 कंप्यूटर और स्नातकोत्तर में 4 छात्रों पर 1 कंप्यूटर होना चाहिए। इसके अलावा लाइब्रेरी में उच्च स्तरीय जर्नल्स जैसे स्कोपस और वेब ऑफ साइंस होना जरूरी है। RDVV इन मानकों का पालन नहीं कर रहा। कुलपति प्रो. राजेश वर्मा ने कहा कि लैब के कंप्यूटर बंद नहीं हैं और छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। नए कंप्यूटर खरीदने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही 200 नए कंप्यूटर के साथ नई लैब शुरू की जाएगी। एनएसयूआई ने कहा- आंदोलन करेंगे एनएसयूआई जिला अध्यक्ष सचिन रजक ने कहा कि छात्रों के भविष्य को अधर में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में गलत जानकारी दी। मौके पर जाकर देखा गया कि विभाग में कोई कंप्यूटर काम करने की हालत में नहीं था। एनएसयूआई जल्द ही इस मामले में व्यापक आंदोलन करेगी। UICSA में बीसीए के लिए प्रति सेमेस्टर 7,500 रुपए और एमसीए के लिए 12,050 रुपए फीस ली जाती है। इसके बावजूद छात्रों को प्रैक्टिकल के लिए खुद लैपटॉप लाना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि “यहां कोई कंप्यूटर काम नहीं करता, प्रैक्टिकल सिर्फ खानापूर्ति हैं और हमारा भविष्य अधर में है।”


