सीधी जनपद पंचायत के ग्राम बढ़ोना में मनरेगा योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि 90 से 100 साल के बुजुर्गों के नाम पर कागजों में काम दिखाकर लाखों रुपए की मजदूरी हड़पी गई है। इस मामले में सरपंच रेनू सिंह, उनके पति और बेटे पर गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायत के अनुसार, गांव की 94 वर्षीय चौरसिया बढ़ई और 98 वर्षीय छोटी विश्वकर्मा का नाम पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में मजदूर के तौर पर दर्ज है। आरोप है कि इन वृद्ध महिलाओं को काम करते हुए दिखाकर उनकी मजदूरी सरपंच के बेटे नीरज सिंह ने निकाल ली। बुजुर्गों के नाम पर सरपंच कर रहे भ्रष्टाचार चौरसिया बढ़ई ने बताया कि उन्होंने कोई काम नहीं किया है। उनके खाते में पैसे आते हैं, जिन्हें वह सरपंच के बेटे नीरज को दे देती हैं। वहीं, छोटी विश्वकर्मा पिछले दो साल से बिस्तर पर हैं और उन्हें दोनों पैरों व कमर में लकवा है। इसके बावजूद उनका नाम भी मजदूरी सूची में शामिल है। उन्होंने बताया कि उनके खाते से भी पैसे निकाले जाते हैं। ग्रामीण दिनकर प्रताप सिंह के अनुसार, यह केवल एक मामला नहीं बल्कि करोड़ों रुपए का घोटाला है। उनका आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद जनपद पंचायत सीईओ और संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिला पंचायत सीईओ से शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं समाजसेवी अरुणेन्द्र प्रताप सिंह ने भी इन अनियमितताओं की शिकायत जिला पंचायत सीईओ और जनपद अधिकारियों से की है। उन्होंने बताया कि आरटीआई आवेदन भी दिया गया है, लेकिन उसका जवाब नहीं मिला है। आरोप है कि पंचायत में सभी मजदूरों के खातों में मजदूरी डालकर सरपंच और उनके परिजन पूरे पैसे निकाल लेते हैं। नियमों के अनुसार, सरपंच या सचिव अपने या रिश्तेदारों को पंचायत से कोई लाभ नहीं दे सकते। जब सरपंच रेनू सिंह से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि “मेरा काम मेरे पति देखते हैं, मैं कुछ नहीं जानती। जो पूछना है मेरे पति से पूछिए। ”वहीं, जनपद पंचायत सीईओ चंदूलाल पनिका ने बताया कि मामला संज्ञान में है और 15 दिन पहले जनसुनवाई में आवेदन मिला था। जांच टीम गठित कर दी गई है और SIR का कार्य पूरा होते ही जांच शुरू कर कार्रवाई की जाएगी।


