बड़वानी के राजघाट स्थित नर्मदा तट पर गुरुवार सुबह ‘नर्मदे हर’ के जयघोष के साथ राजघाट-कोटेश्वर पंचकोशी पदयात्रा का समापन हो गया। पांच दिवसीय इस धार्मिक यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मां नर्मदा की पूजा-अर्चना कर विदाई ली। पदयात्रा समिति के शंकरलाल यादव और शंकरसिंह कौचे ने बताया कि गुरुवार सुबह पदयात्रियों ने पश्चिम दिशा से नर्मदा पुल पार कर कसरावद पहुंचे। यहां से एकलरा बसाहट होते हुए वे राजघाट रोड पर बैकवाटर किनारे पहुंचे, जहां यात्रा का विधिवत समापन हुआ। यह पदयात्रा पांच दिन पहले रविवार सुबह शुरू हुई थी। मां नर्मदा पंचक्रोशी पदयात्रा समिति के तत्वावधान में शूलपाणी झाड़ी की यह 137वीं पांच दिवसीय पदयात्रा थी। इसका आयोजन परम सद्गुरु स्व. रवींद्र भारती चौरे, उज्जैन की स्मृति में किया गया था। इस दौरान बड़वानी और धार जिले के 50 से अधिक स्थानों और नर्मदा तटीय क्षेत्रों में दर्शन-पूजन का लाभ लिया गया। पदयात्री बड़वानी सहित अन्य जिलों व स्थानों से आए थे। यात्रा 1 दिसंबर को पूजन-आरती के बाद ग्राम सोंदूल पुनर्वास मार्ग से भामटा होते हुए जांगरवा पहुंची। वहां से नाव द्वारा मेघनाथ तीर्थ (धार जिले) में प्रवेश किया। इसके बाद पिपरीपुरा दुर्गा मंदिर, चंदनखेड़ी, नवादपुरा कोणदा और हेलादड़ होते हुए भंवरिया में रात्रि विश्राम किया था। 2 दिसंबर को ग्राम भवरिया से निकलकर घुलसर मार्ग से कटनेरा होते हुए प्राचीन सिद्ध क्षेत्र और अंबे मां के दर्शन गैबीनाथ मठ आश्रम (स्वामी महंत 108 रामदास त्यागी) द्वारा स्वल्पाहार, चाय प्रसादी ग्रहण कर निसरपुर में प्रवेश कर मंदिरों के दर्शन कर खाटू श्याम मार्ग से कोठड़ा बसाहट में अल्पाहार कर कड़माल सांई मंदिर में रात्रि विश्राम किया। 3 दिसंबर को पदयात्री ग्राम कड़माल ग्राम पुराने चिखल्दा मार्ग शकर फैक्ट्री से नर्मदा नगर आए। यहां स्वल्पाहार व चाय ग्रहण कर सड़क मार्ग से सौडल बाबा मंदिर चारभुजा मंदिर, गजाननजी महाराज बालीपुर आश्रम दर्शन कर यात्रा ग्राम मलवाड़ा में पहुंची यहां रात्री विश्राम किया। 4 दिसंबर पश्चिम दिशा से सोडल बाबा मार्ग नर्मदा पुल से यात्रा ग्राम कसरावद में मां अंबिका आश्रम दर्शन और मां रेवा के युवा संगठन द्वारा तक्षक नाग मंदिर दर्शन व स्वल्पाहार कर मुख्य सड़क मार्ग से बड़ा भीलट मंदिर दर्शन बीटीआई सड़क मार्ग से मंडी होते हुए राजघाट में पहुंचकर यात्रा का समापन किया गया। यात्रा समापन पर नर्मदा स्नान व ध्वजा पूजन-आरती की गई।


