लुधियाना। खालसा कॉलेज फॉर वुमेन, सिविल लाइंस के मनोविज्ञान विभाग ने अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर वोकेशनल रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर द ब्लाइंड के छात्रों के साथ एक इंटरएक्टिव सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और समावेशन को बढ़ावा देना था, साथ ही छात्रों को वास्तविक जीवन में आने वाली चुनौतियों और दिव्यांगजनों की क्षमताओं से रूबरू कराना था। इस दौरान यात्रा, छात्रों ने दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं से बातचीत की, जो ब्रेल सीखने और पढ़ने, बुनाई और संगीत वाद्ययंत्र बजाने जैसी विभिन्न कौशल गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे। केंद्र के स्टाफ ने छात्रों को संस्थान की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और व्यावसायिक शिक्षा की भूमिका के बारे में विस्तार से अवगत कराया, जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बनाता है। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के प्रशिक्षकों ने ब्रेल पद्धति और मोबिलिटी ट्रेनिंग का छोटा प्रदर्शन किया, जिससे छात्रों को दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन को समझने का अवसर मिला। छात्रों ने इस अनुभव को ज्ञानवर्धक और सोच में सकारात्मक बदलाव लाने वाला बताया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. कमलजीत ग्रेवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी में संवेदनशीलता और समावेशी सोच को मजबूत बनाते हैं।


