राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विश्वविद्यालय विधेयक और कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक पर मिली आपत्तियों पर सरकार से मंतव्य मांगा है। उच्च शिक्षा विभाग से मंतव्य मिलने के बाद राज्यपाल इन विधेयकों पर फैसला लेंगे। राज्य सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र में इन विधेयकों को पारित किया था। विश्वविद्यालय विधेयक में कुलपतियों की नियुक्ति में राज्यपाल के अधिकार को खत्म करने का प्रावधान है। वहीं कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक में 50 से अधिक छात्रों वाले संस्थानों के लिए रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया है। इन संस्थानों को रजिस्ट्रेशन के समय बैंक गारंटी देने की भी बाध्यता है। विधानसभा से पास होने के बाद इन विधेयकों को स्वीकृति के लिए राज्यपाल को भेजा गया था। पर अब तक इस पर स्वीकृति नहीं मिली है। इसी बीच भाजपा समेत करीब दो दर्जन राजनीतिक और गैर राजनीतिक-सामाजिक व छात्र संगठनों ने इन विधेयकों पर आपत्ति उठाते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में उठाई गई आपत्तियों पर ही राज्यपाल ने मंतव्य मांगा है। बैंक गारंटी मांगने पर कोचिंग संचालकों ने जताई है आपत्ति कोचिंग संस्थान नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक में आए बैंक गारंटी पर कोचिंग संचालकों ने आपत्ति जताई थी। कोचिंग संचालकों का कहना था कि बैंक गारंटी के प्रावधान की वजह से छात्रों को राहत मिलने के बदले उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। विधेयक में राज्य में चलने वाले कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए जिला व राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटी बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा इस विधेयक मे 1000 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग सेंटर के संचालकों द्वारा मनोचिकित्सक नियुक्त करना होगा। वीसी नियुक्ति में राज्यपाल का अधिकार खत्म करने का विरोध विपक्ष का आरोप है कि विश्वविद्यालयों पर राज्य सरकार अधिकार जमाना चाहती है। राज्य विश्वविद्यालय विधेयक में कुलपतियों की नियुक्ति के मामले में राज्यपाल के अधिकार को समाप्त करने के प्रावधान पर सर्वाधिक विरोध है। विपक्ष ने इस प्रावधान को राज्यपाल के अधिकार में हस्तक्षेप बताया था। कहा था कि इस प्रावधान से विश्वविद्यालयों पर भी पूरी तरह से सरकार का अधिकार कायम हो जाएगा। विपक्षी दल इस विधेयक के वापस लेने की मांग कर रहे थे। छात्र संगठनों ने भी इसे छात्रों के अधिकारों पर हनन बताया था। विधेयकों की स्वीकृति के लिए राज्यपाल से मिले थे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने पिछले महीने राज्यपाल से मुलाकात कर इन दोनों विधेयकों को स्वीकृति देने का आग्रह किया था। राज्यपाल ने उन्हें बताया था कि कई संगठनों ने इन विधेयकों के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है। इन संगठनों ने उन्हें इस संबंध में ज्ञापन भी दिया है इस पर सरकार को मंतव्य देना चाहिए। इसके बाद राज्यपाल ने इन विधेयकों के संबंध में आए ज्ञापनों को भेजते हुए उच्च शिक्षा विभाग से आपत्तियों पर मंतव्य मांगा। राज्यपाल ने कहा कि आपत्तियों के निराकरण के बाद ही इस पर फैसला लिया जा सकता है। राज्य सरकार ने बहुमत के नशे में यह विधेयक पारित कराया था : सीपी सिंह भाजपा विधायक सीपी सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने बहुमत के नशे में यह विधेयक पारित कराया था। विधेयक के कई बिंदु आपत्तिजनक हैं। आखिर सरकार कुलपतियों के निर्णय का अधिकार क्यों पाना चाहती है। वह राज्यपाल के अधिकारों में क्यों कटौती करना चाहती है। यह गलत है। ऐसे में सरकार इस विधेयक पर फिर से विचार करे।


