झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को पेसा कानून लागू नहीं किए जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से पेसा नियमावली अधिसूचित करने की सटीक समयसीमा बताने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि सरकार यह बताए कि नियमावली कितने दिनों में तैयार कर लागू की जाएगी और इसकी पूरी जानकारी शपथपत्र के रूप में कोर्ट में प्रस्तुत की जाए। राज्य सरकार की ओर से बालू और लघु खनिजों के आवंटन पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया गया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि पेसा नियमावली लागू हुए बिना रोक हटाने पर विचार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है। इससे पूर्व हुई सुनवाई में सरकार ने अदालत को बताया था कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। संशोधित ड्राफ्ट दोबारा कैबिनेट को-ऑर्डिनेशन कमेटी को भेजा है। मंजूरी मिलते ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। पेसा कानून: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को मिलेगा अधिकार संविधान के 73वें संशोधन के तहत पंचायतों को मजबूत करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार ने 1996 में पेसा कानून लागू किया। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के परंपरागत अधिकारों, संसाधनों और स्वशासन की रक्षा करना है। झारखंड में वर्ष 2019 और 2023 में पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया गया था, लेकिन अब तक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसी पृष्ठभूमि में अवमानना याचिका दायर की गई है। पिछले साल जुलाई में दो माह में पेसा लागू करने को कहा था: अदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने पेसा कानून लागू नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की है। 29 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को दो माह के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने पेसा लागू होने तक बालू घाटों और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक लगा दी थी। रोक के चलते राज्य के कई जिलों में चोरी का बालू बिकने की शिकायतें बढ़ी हैं।


