विधानसभा में गुरुवार को प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्त विभाग के तहत जांच संस्था लोकल फंड ऑडिट की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि नगरीय निकायों के बजट वास्तविक आय से चार गुना तक दर्शाए गए हैं। भोपाल नगर निगम में जोन क्रमांक 1 से 19 तक संचालित वाहनों के पेट्रोल और डीजल खर्च का रिकार्ड उपलब्ध नहीं है, क्योंकि इनके लिए लागबुक का संधारण ही नहीं किया गया। इससे ईंधन पर हुए खर्चों का आकलन संभव नहीं है। निगम सीमा के भीतर 285 व्यवसायियों पर 1 अप्रैल 2017 से सेवा शुल्क लगाया गया था, लेकिन इसका रिकार्ड भी संधारित नहीं किया गया। इसी तरह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए परिषद संकल्प के अनुसार प्रभार का निर्धारण नहीं किया गया। आडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के नगरीय निकायों के बजट काल्पनिक हैं और इनमें वास्तविक आय के मुकाबले चार गुना तक आय का प्रावधान कर दिया गया है, जबकि नियमानुसार बजट पिछले तीन वर्षों की आय-व्यय के आधार पर तैयार होना चाहिए। स्थिति यह है कि भोपाल नगर निगम की बताई गई आय 50 प्रतिशत से भी कम है। यही हाल इंदौर, खंडवा, कटनी, छिंदवाड़ा, सागर, रीवा, सतना, उज्जैन, देवास, रतलाम, मुरैना और ग्वालियर नगर निगम का है। विदिशा, बैरसिया, सीहोर और होशंगाबाद समेत 33 नगरपालिकाओं की आमदनी भी आधे से कम पाई गई है। कुल 3500 करोड़ रुपए की बकाया राशि अब तक वसूल नहीं की गई है। जीएसटी कलेक्शन भी घटा… 2023-24 में 37791 करोड़ रुपए जीएसटी जमा हुआ था, जबकि 2024-25 में यह 35837 करोड़ रुपए रहा। राज्य को सेंट्रल जीएसटी से राज्य को 29,504.20 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। इस तरह वर्ष 2024-25 के दौरान जीएसटी के तहत कुल रेवेन्यु रिसिप्ट 65,341.65 करोड़ रुपए थी। लेकिन इस राजस्व हानि के कारण राज्य को सिर्फ 0.89 करोड़ की ही क्षतिपूर्ति प्राप्त हुई। पिछले वित्तीय वर्ष के बजट में 3255.87 करोड़ का त्रुटिपूर्ण प्रावधान कर दिया गया।


