एमएसपी पर मूंगफली की खरीद शुरू हुए दस दिन बीत गए, लेकिन राजफेड ने छह हजार फर्जी टोकन की जगह नए किसानों का नंबर अब तक नहीं लग पाया है। इसे लेकर टोकन से वंचित किसानों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एमएसपी पर मूंगफली की खरीद को लेकर गिरदावरी के बाद टोकन जारी करने में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। राजफेड ने 72500 किसानों को टोकन जारी किए थे। जांच के दौरान इनमें से करीब छह हजार टोकन फर्जी पाए गए। इन सभी को निरस्त कर दिया गया। फर्जीवाड़े को लेकर गजनेर थाने में मुकदमा भी दर्ज है। जिला कलेक्टर ने टोकन के संबंध में राजफेड को रिपोर्ट भेजी थी। निरस्त किए गए टोकन की जगह पर वंचित अन्य किसानों को टोकन जारी होने थे। इसकी प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। नए टोकन ऑफ लाइन जारी होंगे या ऑन लाइन, यह भी अभी तक तय नहीं है। इसे लेकर सहकारिता विभाग और राजफेड के स्थानीय अधिकारियों ने मुख्यालय से मार्ग दर्शन मांगा है। गौरतलब है कि जिले में एमएसपी पर मूंगफली की खरीद 25 दिसंबर से शुरू हुई थी। राजफेड ने अब तक 6025 टोकन जारी किए हैं, लेकिन 615 किसान ही मूंगफली बेचने आए हैं। एक किसान से 40 क्विंटल की ही खरीद होगी। 13 केंद्रों पर किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं, 6 पर तुलाई शुरू नहीं हुई एमएसपी पर मूंगफली की खरीद को लेकर जिले में कुल 42 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से 13 केंद्र ऐसे हैं, जिन पर अब तक किसी भी किसान ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। बज्जू के छह केंद्रों पर किसानों के रजिस्ट्रेशन तो हो गए, लेकिन तुलाई शुरू नहीं हो पा रही है। अन्य सभी केंद्रों पर तुलाई शुरू हो गई है। बीकानेर और श्रीडूंगरगढ़ केवीएसएस पर ठेका निरस्त होने के कारण तुलाई शुरू होने में देरी है। नई मूंगफली में 20% तक नमी जिले में एमएसपी पर मूंगफली की खरीद तो शुरू हो गई, लेकिन सरकारी दर बाजार से अधिक होने पर भी किसानों का रुझान नहीं बन रहा है। कारण नई मूंगफली में 15 से 20% तक नमी होती है, जबकि सरकार 8% से ज्यादा नमी वाली मूंगफली नहीं खरीद रही। ऐसे में किसान कम भाव पर भी अपनी फसल बाजार में बेच रहे हैं। किसानों का रुझान नहीं बनने का दूसरा कारण यह भी है कि सरकारी दर 7263 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में 6500 रुपए तक मूंगफली हाथोंहाथ बिक रही है। किसान पांच-सात सौ रुपए के लिए अपना समय खराब नहीं करना चाहते। शादियों का सीजन है और खेतों में रबी की बिजाई चल रही है। इसके अलावा सरकारी खरीद में किसान दस्तावेजों के झंझट में नहीं पड़ना चाहता।


