सतना में सेंट्रल जीएसटी के निरीक्षक कुमार सौरभ को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते लोकायुक्त ने रंगे हाथों पकड़ा था। विभाग ने गुरुवार को उन पर पहली प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रिवेंटिव शाखा से हटाकर टेक्निकल शाखा में अटैच कर दिया है। हालांकि, विभाग ने अभी तक उन्हें निलंबित नहीं किया है और न ही कोई वैधानिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। विभाग फिलहाल लोकायुक्त रीवा द्वारा भेजी जाने वाली विस्तृत कार्रवाई और पंचनामा रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, निरीक्षक कुमार सौरभ का एक और मामला चर्चा में है। उन्होंने 24 दिसंबर को होने वाले बिहार पीएससी साक्षात्कार के लिए विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए आवेदन किया था। भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े जाने के बाद स्थिति बदल गई है। सूत्रों का मानना है कि केंद्रीय सरकार आमतौर पर ऐसे कर्मचारियों को राज्य सेवा में शामिल होने के लिए एनओसी नहीं देती है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप और गंभीर जांच लंबित हो। निरीक्षक सौरभ प्रिवेंटिव शाखा में धारा 64 और 74 से संबंधित मामलों की जांच करते थे। उन पर वर्ष 2020-21 के ई-वे बिल प्रकरण में कार्रवाई का भय दिखाकर 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त टीम ने मंगलवार को उन्हें उनके सरकारी आवास पर 20 हजार रुपए की पहली किस्त लेते हुए गिरफ्तार किया था।


