झालावाड़ में कृषि विज्ञान केंद्र और आईटीसी मिशन सुनहरा कल के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मृदा दिवस मनाया गया। यह आयोजन ‘स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा’ थीम पर केंद्रित था, जिसमें 60 किसानों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ मृदा से स्वस्थ उत्पादन करने हेतु प्रेरित करना था। इस दौरान मृदा स्वास्थ्य सुधार के विभिन्न उपायों पर भी जानकारी दी गई। ‘स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मृदा’ थीम पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. टी.सी. शर्मा, कृषि अनुसंधान अधिकारी, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, झालावाड़ ने मृदा संरक्षण, जैविक खेती और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को भूमि की पोषक स्थिति की सटीक जानकारी देता है, जिससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होता है और मृदा गुणवत्ता में सुधार आता है। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि इसके माध्यम से किसान जैविक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर मृदा संरक्षण तथा सतत कृषि को बढ़ावा दे सकते हैं। विषय विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डॉ. तुलिका आचार्य ने बताया कि स्वस्थ और पोषक तत्वों से भरपूर मृदा ही फसलों में समस्त पोषक तत्व प्रदान करती है, जो मानव जीवन को संतुलित पोषण देते हैं। उन्होंने स्वस्थ फसल के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण से विभिन्न गुणकारी उत्पाद बनाकर अधिक आय अर्जित करने के तरीकों पर भी चर्चा की। विषय विशेषज्ञ (पशुपालन विज्ञान) डॉ. हितेश मुवाल ने प्राकृतिक खेती के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह रसायनमुक्त खेती मृदा की उपजाऊ शक्ति, जलधारण क्षमता और सूक्ष्मजीव गतिविधि को बढ़ाकर उसे अधिक जीवंत बनाती है। एसआईआईआरडी के कृषि विशेषज्ञ सत्यनारायण पाटीदार ने हरी खाद, जैव उर्वरक, बायोगैस स्लरी और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को मृदा स्वास्थ्य सुधार का प्रमुख माध्यम बताया। उन्होंने क्लाइमेट स्मार्ट कृषि पद्धतियों पर भी विस्तृत जानकारी दी। तकनीकी सहायक सुनीता कुमारी और वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता दिनेश चौधरी ने भी कार्यक्रम में सहयोग करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। राहुल सांखला और शाहरुख खान ने भी इस आयोजन में अपना सहयोग प्रदान किया।


