ESI अस्पताल में गुरुवार से ही इलाज कराने पहुंचे सैकड़ों कर्मचारी और उनके परिवार गंभीर अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी सुबह के समय सर्वर ठप हो गया, जिसकी वजह से पर्चा बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई। सुबह 9 बजे से लाइन में लगे लोग दोपहर 1 बजे तक खड़े रहे, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। अस्पताल में रोजाना सैकड़ों कर्मचारी इलाज कराने पहुंचते हैं, जिनकी सैलरी से हर महीने बीमा राशि काटी जाती है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलना, घंटों लाइन में खड़े रहना और सिस्टम फेल होना मरीजों की नाराजगी को बढ़ा रहा है। महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को लेकर आने वाले परिजन तक इंतजार में खड़े हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. परविंदर के अनुसार, सुबह लोड ज्यादा रहता है, तभी सर्वर में दिक्कत आई थी। यह समस्या हेडक्वार्टर स्तर की है, अस्पताल इसे सीधे ठीक नहीं कर सकता। दोपहर 3 बजे तीनों रजिस्ट्रेशन विंडो खुल चुकी थीं और लाइन में केवल 7 लोग बचे थे। सैलरी से पैसा कटता है, इलाज के समय वही परेशानी
रजिस्ट्रेशन लाइन में खड़ी एक महिला ने बताया कि वे सुबह 11 बजे पहुंची थीं और डेढ़ घंटे तक खड़ी रहीं, लेकिन उनका नंबर नहीं आया। महिला बोलीं कि हम हर महीने बीमा राशि कटवाते हैं, इलाज का भरोसा लेकर ESI अस्पताल आते हैं। पर यहां रोज कोई न कोई दिक्कत रहती है। कभी डॉक्टर नहीं, कभी दवा नहीं, अब सर्वर बंद। यह अकेली उनकी कहानी नहीं। सुबह के समय 150 से अधिक मरीज घंटों लाइन में टिके रहे, पर सिस्टम चालू न होने से सब निराश होकर इधर-उधर बैठते दिखाई दिए। डॉक्टरों की कमी से लेकर दवाओं का संकट
श्रमिक कांग्रेस के नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि, ESI अस्पताल में समस्याएं सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं हैं। यहां मरीजों को रोजाना कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और नर्सों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और खराब सुविधाओं के कारण श्रमिकों को ढंग का इलाज नहीं मिल पाता। जबकि हर महीने उनकी सैलरी से इलाज के पैसे कटते है जो करोड़ों रुपए की होती हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को कई बार दूसरे संस्थानों में भेज दिया जाता है या उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई मरीजों को बताया जाता है कि दवा उपलब्ध नहीं है, बाहर से खरीदनी पड़ेगी। यह स्थिति ESI जैसी सरकारी संरचना पर सवाल खड़ा करती है। अस्पताल भवन में साफ-सफाई की कमी, आधुनिक मशीनों का अभाव और पुराने उपकरणों के कारण मरीजों को असुविधा होती है। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर रोजाना भीड़ देखी जाती है। सर्वर डाउन की समस्या ने इस परेशानी को और भी बढ़ा दिया है। हेडक्वार्टर से मदद मांगी
अधीक्षक डॉ. परविंदर के मुताबिक सर्वर का संचालन स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि हेडक्वार्टर स्तर से किया जाता है। इस कारण बार-बार आने वाली समस्या पर अस्पताल तुरंत नियंत्रण नहीं कर पा रहा। उन्होंने कहा कि, तकनीकी टीम को जानकारी भेज दी गई है और जल्द स्थायी समाधान की उम्मीद है।


