भास्कर न्यूज | अमृतसर अखिल भारतीय श्री चैतन्य गौड़ीय मठ संस्था के वैष्णव संत जगत गुरु श्री श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज जी का जन्मों महामहोत्सव दुर्ग्याणा तीर्थ वेदकथा भवन में मनाया गया। जिसके अंतर्गत रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक संकीर्तन और हरिकथा का आयोजन किया गया। जिसमें देश के भिन्न-भिन्न राज्यों से आए महात्मा वक्ताओं ने हरिकथा सुनाई। इस दौरान भक्ति विबुद्ध मुनि ने महाराज श्री की शिक्षाओं का सार बताते हुए कहा कि परमब्रहम भगवान की कृपा ही सद्गुरु के रूप में प्रकट होती है। सद्गुरु भगवान नहीं है, अपितु भगवान के अत्यन्त प्रियजन हैं। वह तो केवल भगवत प्राप्ति का मार्ग दर्शन करते हैं। आध्यात्मिक मार्ग में गुरुकृपा के अतिरिक्त और कोई संबल नहीं है। गंगा के तो स्पर्श करने के पश्चात व्यक्ति पवित्र होता है, किन्तु संत के तो दर्शन मात्र से ही तन-मन दोनों पावन हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जगत में धर्म के नाम पर कट्टरता ने प्रवेश किया है। कट्टरता के कारण हम एक-दूसरे के प्रति द्वेष, शत्रुता और हिंसा करते हैं। हम यह सोचते भी नहीं कि क्या सच में धर्म हमें इस प्रकार की शिक्षा देता है? यह धर्म की शिक्षाओं का अपव्यवहार है वास्तव धर्म नहीं है। वर्तमान में कुछ गिने चुने ही उच्चतम कोटि के संत जिनमें एक विशेष नाम है परमहंस श्रीमद् भक्ति बल्लभ तीर्थ गोस्वामी महाराज। इस मौके पर पूज्यपाद श्रीमद् भक्त विलास त्रिदंडी महाराज, श्रीमद् भक्ति प्रसन्न त्यागी महाराज और भक्ति सुहृद परमाद्वैती और राम गौरव गुलाटी समेत कई संत महापुरुष मौजूद थे।


