भास्कर संवाददाता | रायसेन कृषि विज्ञान केन्द्र नकतरा में अंतरराष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम की थीम “स्वस्थ मृदा–स्वस्थ शहर” रही। वरिष्ठ वैज्ञानिक और केन्द्र प्रमुख डॉ. स्वप्निल दुबे ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से होने वाले नुकसान बताए। मिट्टी की गिरती गुणवत्ता पर भी जानकारी दी। डॉ. दुबे ने कहा कि धान–गेहूं क्षेत्र में नरवाई जलाना नुकसानदेह है। 1 टन नरवाई जलाने से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर जैसे पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इससे प्रदूषित गैसें वातावरण में फैलती हैं। किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज, स्ट्रॉ बेलर और पूसा डी-कम्पोजर के उपयोग की सलाह दी गई। सहायक कृषि यंत्री संदीप टेकाम ने बताया कि हैप्पी सीडर पर 79 हजार और सुपर सीडर पर 1.05 लाख रुपये तक 50% अनुदान मिलता है। मृदा वैज्ञानिक रंजीत सिंह राघव ने संतुलित खाद प्रबंधन, जैविक खाद, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग पर जोर दिया। डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी।


