राजस्थान हाईकोर्ट के 39 जजों को विभिन्न जिलों और न्याय क्षेत्रों की गार्जियनशिप (अभिभावकत्व) की जिम्मेदारी पुनर्व्यवस्था की गई है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार- जजों की सेवानिवृत्ति और स्थानांतरण के परिणास्वरूप पिछले आदेश को निरस्त करनते हुए यह नया आवंटन तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। सभी न्यायाधीश संबंधित जिले में न्यायिक अधिकारियों की दक्षता और सत्यनिष्ठा के आकलन के मामले में अपने क्षेत्र की समीक्षा करेंगे। समय-समय पर मुख्य न्यायाधीश को सलाह देंगे। इसके लिए जज अपने क्षेत्र के दौरे की पूर्व सूचना भी मुख्य न्यायाधीश को देंगे। ताकि कोर्ट के मुख्य कार्यों पर कम से कम प्रभाव पड़े। जानें…किसे कहां की जिम्मेदारी मिली- टूर प्रोग्राम की पूर्व सूचना अनिवार्य आदेश में इन जजों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने टूर प्रोग्राम की सूचना मुख्य न्यायाधीश को अपने दौरे पर जाने से पहले दें। अपने दौरों की योजना बनाते समय इनसे अनुरोध किया गया है कि वे इसे इस तरह समायोजित करें कि जहां तक संभव हो कोर्ट का कार्य प्रभावित न हो। गार्जियनशिप क्या है? गार्जियनशिप न्यायक्षेत्र का मतलब होता है कि किसी बड़े न्यायालय (जैसे- हाईकोर्ट) के एक-एक जज को राज्य के अलग-अलग जिलों के कोर्ट की ‘देखरेख’ और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी देना। इसमें गार्जियन जज अदालतों का कामकाज, ईमानदारी और कार्यक्षमता पर नजर रखते हैं। अगर किसी इलाके में अदालतों से जुड़ी कोई समस्या है। न्याय की गुणवत्ता सुधारनी है, दिशा-निर्देश देने हैं। गार्जियन जज वहां के अधिकारियों को सलाह देंगे। जरूरी जानकारी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजेंगे। इससे पूरे राज्य की न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है। इन बातों का ध्यान रखेंगे जज


