मऊगंज के सहकारी बैंक में 6 करोड़ का घोटाला:3000 लोग 3 साल से भटक रहे, कोई शादी नहीं कर पा रहा तो कोई इलाज

नातिन की शादी करनी है, घर में मरीज है, बनारस से दवाई चलती है, पैसों की बहुत जरूरत है। बैंक में 3 लाख रुपए जमा हैं, लेकिन मिल नहीं रहा है। कई महीनों से बैंक के चक्कर काट रहा हूं। यह कहते हुए 80 साल के रामछवीले तिवारी की आंखों में बेबसी और थकान साफ झलकती है। उम्र के इस पड़ाव पर, जहां उन्हें आराम करना चाहिए था, वे अपनी गाढ़ी कमाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। दरअसल, रामछवीले ने बड़ी मुश्किल से एक-एक पाई जोड़कर 10 लाख रुपए सहकारी समिति बिछरहटा में तीन अलग-अलग खातों में जमा किए थे। ये पैसे उन्होंने नातिन की शादी और अपने बुढ़ापे के इलाज के लिए बचाकर रखे थे। लेकिन आज जब उन्हें इन पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत है, तो बैंक उन्हें यह कहकर लौटा रहा है कि ‘बैंक के पास पैसे ही नहीं हैं।’ ये कहानी केवल रामछवीले की नहीं है, बल्कि ऐसे तीन हजार से ज्यादा लोग हैं, जिन्हें पिछले 3 साल से अपना पैसा नहीं मिल पा रहा है। खास बात ये है कि इस पूरे मामले की एक साल पहले जांच हो चुकी है और सहकारी समिति को हितग्राहियों को पैसे देने के निर्देश भी दिए गए हैं। आखिर क्या है ये पूरा मामला? पढ़िए ये रिपोर्ट पहले जानिए क्या है मामला
मऊगंज जिले की सहकारी बैंक की शाखा पहाड़ी के तहत आने वाली पांच शाखाएं- हरदी, गौरी, देवरा पटेहरा, टटिहरा और हटवा में खाताधारकों के 10 करोड़ रु. से ज्यादा जमा थे। इन पांचों शाखाओं से करीब 3,000 खाताधारक जुड़े हैं। तीन साल पहले बैंक की शाखाओं ने खाताधारकों को पैसा देना बंद कर दिया। उस समय मऊगंज जिला अस्तित्व में नहीं आया था, लिहाजा रीवा कलेक्टर से शिकायत की गई। जब सैकड़ों पीड़ितों ने रीवा और मऊगंज में जनसुनवाई में अपनी समस्याएं उठाई और कई जगह धरना-प्रदर्शन किया, तब प्रशासन की नींद टूटी। जिला सहकारी बैंक रीवा ने 12 जनवरी 2024 और तत्कालीन मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने 16 फरवरी 2024 को राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक), भोपाल को पत्र लिखकर जांच की मांग की। अपेक्स बैंक की जांच कमेटी ने जब इन पांच शाखाओं के खातों की जांच की, तो एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया। जांच में पता चला कि इन समितियों के बचत और एफडी खातों में जमा 6 करोड़ 60 लाख 37 हजार रुपए अवैध रूप से अन्य मदों में ट्रांसफर कर दिए गए थे, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। यह राशि खाताधारकों को भुगतान के लिए उपलब्ध ही नहीं थी, यानी जनता का पैसा बैंक से गायब हो चुका था। कैसे हुआ जनता के पैसों का गबन?
जिला सहकारी बैंक मुख्य रूप से किसानों और ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। ये बैंक अपनी छोटी शाखाओं, यानी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के जरिए ग्राहकों से जुड़ते हैं। इन शाखाओं में किसानों के फसल ऋण, MSP भुगतान और अन्य सरकारी योजनाओं का पैसा आता है। जब इन समितियों में भ्रष्टाचार होता है, तो इसका सीधा असर गरीब किसानों और छोटे बचतकर्ताओं पर पड़ता है। जांच में सामने आया कि शाखा प्रबंधकों और समिति प्रबंधकों ने मिलीभगत कर इस घोटाले को अंजाम दिया। उन्होंने खाताधारकों की बचत राशि को निकालकर सीधे किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के ऋण खातों में जमा कर दिया। इस फर्जीवाड़े का मुख्य उद्देश्य कागजों पर KCC ऋणों की वसूली को 100% दिखाना था, ताकि बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत दिखे और अधिकारी अपनी पीठ थपथपा सकें। जब असल में ऋणों की वसूली हुई, तो वह पैसा वापस बचत खातों में जमा करने के बजाय गबन कर लिया गया। गबन के लिए नियमों की इस तरह से धज्जियां उड़ाई गईं किस समिति में किस तरह से गबन हुआ जांच में यह भी पाया गया कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रीवा के प्रबंधक ज्ञानेंद्र पांडेय का इन समितियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था, जिसके कारण यह घोटाला इतने बड़े पैमाने पर हो सका। एक साल बाद भी न्याय का इंतजार
इस घोटाले की जांच रिपोर्ट 15 जुलाई 2024 को आ गई थी। रिपोर्ट में साफ तौर पर निर्देश दिए गए थे कि अन्य मदों में खर्च की गई राशि को तुरंत शाखाओं में जमा कराया जाए ताकि लोग अपना पैसा निकाल सकें। लेकिन रिपोर्ट आए एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है। पीड़ितों को आज भी उनका पैसा नहीं मिल रहा है और वे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। रहसकली गुप्ता का खाता सेवा सहकारी हरदी में है। रहसकली ने बताया कि हरदी समिति में 7 लाख रुपए जमा है। मेरी बेटी शादी की योग्य हो गई है। चार साल से पैसे के लिए भटक रही हूं। कलेक्टर बोले- संबंधित अधिकारियों से पत्राचार कर रहे
रहसकली की तरह संकर्षण प्रसाद गौतम की 1.16 लाख की एफडी 2023 में पूरी हो चुकी है। मिठाई लाल गुप्ता की 5 लाख की एफडी अक्टूबर 2024 में पूरी हो गई, लेकिन उन्हें एक रुपया नहीं मिला। यह सूची बहुत लंबी है, जिसमें हर नाम के पीछे एक टूटे हुए सपने और भरोसे की कहानी है। इस मसले पर मऊगंज कलेक्टर संजय जैन का कहना है कि जनसुनवाई में लोगों ने इन शाखाओं से पैसे नहीं निकलने की शिकायत की है। जांच रिपोर्ट में भी गबन की पुष्टि हुई है।

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