साइंस हाउस:टेंडर जीता, दूसरे नंबर की कंपनी से पार्टनरशिप कर 51% मालिकाना हक दिया

जिला, सिविल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पैथोलॉजी खोलकर जांच कर रही निजी कंपनी साइंस हाउस मेडिकल प्रालि. के टेंडर से जुड़े खेल भी सामने आ गए हैं। 5 साल पहले टेंडर के समय कॉन्ट्रेक्ट जीतने वाली साइंस हाउस ने 5 माह बाद दूसरे नंबर पर आई कंपनी न्यूबर्ग सुप्राटैक रिफरेंस लेबोरेटरी प्रालि. के साथ पार्टनरशिप कर ली। इसमें मालिकाना हक 51% दूसरे नंबर की कंपनी को दे दिया। यानि पार्टनरशिप में 25 लाख रुपए रखे गए। इसमें न्यूबर्ग ने 12.75 लाख दिए, जबकि साइंस हाउस ने 12.25 लाख रुपए ​दिए। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए जवाब में यह तथ्य सामने आया। टेंडर के समय 6 कंपनियां थीं। तकनीकी परीक्षण के दौरान 3 को बाहर कर दिया। तीन कंपनियां ही रेस में रहीं। इनमें साइंस हाउस, न्यूबर्ग व तीसरी कंपनी जीटीआई इंफोटेल प्रालि. शामिल हैं। साइंस हाउस व न्यूबर्ग बाद में पार्टनर बन गईं। टेंडर के दौरान साइंस हाउस ने 53% डिस्काउंट पर कॉन्ट्रेक्ट लिया था, जबकि न्यूबर्ग ने 38% का ऑफर दिया था। फिर दो कंपनियां बनीं। पीओसीटी साइंस हाउस प्रालि., जिसने वेटलीज रियेजेंट रेटल मॉडल पर और दूसरी कंपनी साइंस हाउस प्रालि. ने हब एंड स्पोक मॉडल पर काम किया। एक ने जिला व सिविल अस्पताल संभाला, दूसरी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में काम किया । जयवर्धन ने पीसीसी में मीडिया से कहा कि एक ही समूह ने दो नामों से काम किया, कागजों में जांचें चढ़ाकर सरकार के संरक्षण में अरबों का घोटाला कर दिया। सवाल उठे … एक ही व्यक्ति की दो कंपनियों को अलग-अलग नाम से टेंडर दिया 1. स्वास्थ्य विभाग में 943 करोड़ रुपए का कथित महाघोटाला हुआ। विधानसभा में 68 हजार पन्नों का रिकॉर्ड आया है, जिनके प्रारंभिक अध्ययन में यह सामने आया कि 7 करोड़ की आबादी पर 12.84 करोड़ जांचें दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए। 2. एक ही व्यक्ति की दो कंपनियों को अलग-अलग नाम से टेंडर दिया गया। एक ही टेस्ट के अलग-अलग रेट लगाकर भारी लूट हुई। जीरो % जीएसटी वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर 18% जीएसटी वसूला गया। ब्लॉक अस्पतालों, सीएचएस और पीएचएस में जमीन पर जांच किए बिना फर्जी रिपोर्टें बनाई गईं। 3. यह वही कंपनी है जिस पर ईडी व इनकम टैक्स की कार्रवाई हो चुकी है। मालिक जेल जा चुका है। फिर भी भाजपा सरकार ने जुलाई 2025 में इसे एक वर्ष का एक्सटेंशन दे दिया। स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवा को निजी कंपनियों के हवाले कर जनता के जीवन से खेला गया। 4. मरीजों की सेहत की कीमत पर सरकार भ्रष्ट कंपनी को बचा रही है। अधिकांश जिलों में मशीनें खराब पड़ी हैं, कहीं वास्तविक जांच ही नहीं हुई, लेकिन बिल पूरा दिया गया। कुल 2019 शासकीय संस्थाओं में पैथोलॉजी सुविधा आउटसोर्स पर है। दो मॉडल पर पैथोलॉजी सुविधा दी गई: सरकार जयवर्धन की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि प्रदेश में दो मॉडल पर पैथोलॉजी सुविधा दी गई। वेटलीज पर 50 जिला व 35 सिविल अस्पतालों में व बाकी 1934 में हब व स्पोक मॉडल पर काम किया गया।

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