राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में उजागर हुए एकेडमिक करप्शन और वित्तीय अनियमितता का मुद्दा बुधवार को विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। भाजपा के ही विधायक भगवानदास सबनानी और अनिल जैन कालूहेड़ा ने आरजीपीवी को लेकर ध्यानाकर्षण लगाया और आरजीपीवी में धारा-54 लागू करने की मांग की। सबनानी ने कहा कि पुराने कुलगुरु (प्रो. राजीव त्रिपाठी) के इस्तीफे के बाद बनाए गए कार्यवाहक कुलगुरु (प्रो. एससी चौबे) के विरुद्ध भी वित्तीय अनियमितता की जांच लंबित है। इसको लेकर विधानसभा में विभागीय मंत्री इंदर सिंह परमार ने सदन में बताया कि टेक्निकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम ( टीईक्यूआईपी)-3 से संबंधित शिकायत की जांच प्रक्रियाधीन है और अंतिम प्रतिवेदन अभी प्राप्त नहीं हुआ है। विवि में धारा 54 लागू करने को लेकर मंत्री ने सदन में बताया कि इस बारे में भी हम परीक्षण करवा रहे हैं और विवि द्वारा नैक ग्रेड प्राप्त करने के लिए अपलोड किए डेटा का भौतिक डेटा से मिलान कराया जा रहा है। टीईक्यूआईपी जांच और नैक रिपोर्ट में गड़बड़ी के आरोप बता दें कि कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. चौबे टीईक्यूआईपी के प्रभारी रहे हैं। ऐसे में मंत्री के इस जवाब ने प्रो. एससी चौबे की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, आरजीपीवी ने नैक से ए++ ग्रेट प्राप्त करने के लिए सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) में गलत जानकारी दी। यह मामला दैनिक भास्कर ने उजागर किया था। इसके तत्कालीन वीसी प्रो. राजीव त्रिपाठी ने इस्तीफा दिया। डीन होने के नाते राजभवन ने प्रो. चौबे को कार्यवाहक वीसी बनाया। जबकि टीईक्यूआईपी-3 के 20 करोड़ रुपए के खर्च और खरीद में अनियमितता के आरोपों की तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जांच चल रही है। प्रो. चौबे ने डीन बनने के लिए स्वयं के द्वारा सत्यापित प्रमाणपत्र में उनके खिलाफ टीईक्यूआईपी के मामले में जांच लंबित होने की जानकारी छिपाई। मामले में आरजीपीवी के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. एससी चौबे से बात की तो उन्होंने बताया कि मैंने कोई जानकारी नहीं भेजी। तत्कालीन कुलगुरु द्वारा जानकारी भेजी गई। मैंने कुलगुरु को क्या लिखकर दिया? यह मुझे देखना पड़ेगा। जांच तो चलती ही रहती हैं।


