बैतूल उपभोक्ता आयोग ने दो अलग-अलग मामलों में बैंकों को किसानों को फसल बीमा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। बैंकों की गलती के कारण किसानों को या तो कम बीमा मिला था या बिल्कुल नहीं मिला था। आयोग के आदेश के बाद लालावाड़ी और जीन के किसानों को कुल 1 लाख रुपए से अधिक की बीमा राशि मिलेगी। पहला मामला आमला तहसील के ग्राम लालावाड़ी के किसान रविंद्र का है। पंजाब नेशनल बैंक ने उनके पटवारी हल्का नंबर में बदलाव कर दिया था, जिसके कारण उन्हें कम फसल बीमा राशि मिली। दूसरा मामला बैतूल तहसील के ग्राम जीन के किसान राजेंद्र का है, जिन्होंने अऋणी कृषक के रूप में अपनी फसल का बीमा कराया था। हालांकि, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, जीन शाखा ने पोर्टल पर उनकी जानकारी दर्ज नहीं की, जिससे उन्हें फसल बीमा नहीं मिल पाया। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष/न्यायाधीश विजय कुमार पाण्डेय और सदस्य चंद्रयोखर माकोड़े ने इस मामले में न्याय दिया। एडवोकेट दिनेश यादव ने बताया कि आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार, फसल बीमा से संबंधित जानकारी/आंकड़े संबंधित बैंक द्वारा ही केंद्र सरकार के पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं। बीमा क्लेम का निर्धारण और भुगतान बैंक द्वारा अपलोड की गई जानकारी के आधार पर ही होता है। योजना के प्रावधानों के तहत, बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि कृषक अपनी शाखा या पैक्स की गलतियों, चूकों या त्रुटियों के कारण किसी भी लाभ से वंचित न हों। ऐसी त्रुटियों के मामले में संबंधित संस्थान सभी प्रकार के नुकसान की भरपाई करेंगे। इस आदेश के बाद, पंजाब नेशनल बैंक की आमला शाखा ग्राम लालावाड़ी के किसान रविंद्र को 66,625 रुपए का भुगतान करेगी। वहीं, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की जीन शाखा ग्राम जीन के किसान राजेंद्र को 34,530 रुपए देगी। इस राशि में मानसिक संत्रास और वाद व्यय भी शामिल है। यदि समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो बैंकों को आदेश की तारीख से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।


