मऊगंज 72 घंटे की GST रेड 52.91 लाख में निपटी:35 लाख की टैक्स चोरी के बावजूद कार्रवाई नहीं; मीडिया से बचते रहे अधिकारी

मऊगंज जिला मुख्यालय में स्थित सराफा कारोबारी ‘मोहित टंच’ की फर्मों, बीएम ऑर्नामेंट्स और एसएम ज्वेलर्स पर राज्य कर विभाग की ओर से की गई 72 घंटे की जीएसटी छापेमारी अब विवादों में घिर गई है। जांच में कर चोरी के गंभीर संकेत मिलने के बावजूद, अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। अधिकारियों का मीडिया से बचना और कार्रवाई का 52.91 लाख रुपए में ‘निपट जाना’ को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। छापेमारी के तीसरे दिन देर रात करीब 10:30 बजे जब जीएसटी अधिकारी कार्रवाई समाप्त कर बाहर निकले तो मीडिया को देखते ही वे वापस अंदर लौट गए। काफी देर बाद दोबारा बाहर आने पर भी अधिकारियों ने कैमरों से बचने की पूरी कोशिश की। लगातार सवालों पर सहायक आयुक्त अमित पटेल ने केवल इतना कहा कि “मैं मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हूं।” उनके अधूरे जवाबों ने पारदर्शिता पर और सवाल खड़े कर दिए। जांच में कच्चे बिल-फर्जी वाउचर मिले बताया गया है कि दो वित्तीय वर्षों में इन फर्मों ने सिर्फ ₹3.25 लाख नकद जमा किया था, जबकि उनका कारोबार काफी बड़ा है। जांच में सामने आया कि फर्मों ने 99% लेनदेन आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) पर किए, कच्चे बिल और गलत वाउचर मिले, तथा स्टॉक और बिक्री में बड़ा अंतर पाया गया। इन गंभीर अनियमितताओं के बावजूद, मामला केवल ₹52.91 लाख जमा कराकर निपटा दिया गया। सहायक आयुक्त अमित पटेल ने ₹35 लाख की कर अपवंचना का प्रस्ताव दिया था, लेकिन जमा राशि उससे अधिक क्यों और कैसे तय हुई, यह विभाग ने स्पष्ट नहीं किया है। डीलर की पारिवारिक वजह से रुका मूल्यांकन अमित पटेल ने इस संबंध में सफाई देते हुए बताया कि फर्में मुख्य रूप से जेवर और थोक व्यापार का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि नकद देनदारी बहुत कम पाई गई, जिसे लेकर डेटा विश्लेषण में विसंगतियां सामने आईं। पटेल ने यह भी बताया कि “डीलर बीएम ऑर्नामेंट्स का मालिक महाराष्ट्र के शामली में रहता है, उसकी माता की तबीयत खराब थी, इसलिए मूल्यांकन कार्य रोका गया और कार्रवाई लंबी चली।” बिलिंग अनियमितताओं पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा-“ व्यापारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले ग्राहक अक्सर बिल नहीं लेते। हालांकि उन्होंने कहा कि बिल देना व्यापारी की जिम्मेदारी है। कुछ बिल हमने जब्त किए हैं, जांच के बाद कार्रवाई होगी।” मऊगंज सराफा बाजार पर भी उठे सवाल बिना बिल-वाउचर के कारोबार की शिकायतें पहले से थीं। तीन दिन तक चली रेड और अधिकारियों की चुप्पी से पूरे सराफा बाजार में चर्चा तेज है कि क्या पूरी कार्रवाई दबाव बनाकर ‘सेटलमेंट’ करने का तरीका थी? मऊगंज में कर विभाग का यह मामला अब जनचर्चा का विषय बन गया है कि क्या 72 घंटे की कार्रवाई भ्रष्टाचार और पर्दादारी की कहानी छुपा रही है या वास्तव में कर चोरी का खुलासा?

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