सागर जिले में भाजपा दो जिलाध्यक्ष बनाने जा रही है। यह शहरी और ग्रामीण की तर्ज पर न होकर लोकसभा क्षेत्र के हिस्सों के आधार पर बनाए जा रहे हैं। जिले के कई भाजपा कार्यकर्ता और नेता इस फैसले के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि एक जिला पांच विधानसभा क्षेत्रों का बना और दूसरा तीन विधानसभा क्षेत्रों का तो यह बेहद छोटा कार्यक्षेत्र हो जाएगा। दूसरा यदि रहली, बंडा और देवरी विधानसभा का जिला बनाया गया तो उसका मुख्यालय कहां होगा? इन्हीं तीन में से किसी एक नगर को मुख्यालय बनाया गया तो यहां के नेता सागर जिला मुख्यालय की राजनीति से कट जाएंगे। उनके जो भी कार्यक्रम होंगे, वहीं पर होंगे। एक पदाधिकारी ने कहा कि यह बिल्कुल भी व्यवहारिक नहीं है। संगठन के स्तर पर हमें कुछ भी नहीं बताया जा रहा है। मीडिया के माध्यम से ही यह सब पता लग रहा है। यह मामला प्रबंध समिति में रखा जाए। उसमें इसके गुण-दोष बताएं। साथ ही यह भी बताएं कि इसकी जरूरत क्या है? जिला मुख्यालय की राजनीति से एक क्षेत्र विशेष को वंचित क्यों किया जा रहा है? उनकी एक राय यह भी है कि सबसे संवाद कर निर्णय लें। यदि दो जिले बनाना जरूरी भी हैं तो नरयावली विधानसभा को भी उसमें शामिल करें, ताकि दोनाें जिलाध्यक्षों के मुख्यालय सागर में ही रहें। जिससे एक क्षेत्र विशेष के नेता जिला और संभागीय मुख्यालय की राजनीति से दूर न रहें। संघ की संरचना में सागर में 3 जिले, रहली से पहले बीना का नाम संघ की संरचना में सागर विभाग में 4 जिले हैं। इनमें सागर और दमोह के अलावा बीना और रहली भी शामिल हैं। यानी सागर जिले में 3 जिले हैं। संघ ने रहली से पहले बीना को जिला बनाया था। अब भाजपा भी इसी संरचना पर चलते हुए रहली, बंडा और देवरी विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलग से जिलाध्यक्ष बनाने का मसौदा बना चुकी है। दरअसल, बीना को यदि जिला बनाया जाता है तो वहां वैसे ही प्रशासनिक स्तर के जिले में शामिल होने से खुरई क्षेत्र के लोग विरोध जता रहे हैं। भाजपा यदि बीना क्षेत्र में जिलाध्यक्ष बनाती और उसमें खुरई क्षेत्र को शामिल करती या नजदीकी विधानसभा क्षेत्र सुरखी और नरयावली को भी जोड़ती तब भी विरोध के सुर सामने आ सकते थे। उपचुनाव की संभावना के बीच भाजपा ऐसा जाेखिम मोल नहीं लेना चाहती, इसीलिए रहली, बंडा और देवरी का अलग से जिलाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव बनाया है। अब दिल्ली में दोबारा मौका देने पर दवाब, दावेदार अपने को मान रहे दौड़ में सागर के दोनों जिलाध्यक्षों के लिए पैनल तैयार हो गए हैं। एक में दो ओबीसी, एक सामान्य और एक एससी महिला का नाम तो दूसरे में दो सामान्य, एक ओबीसी और एक एससी महिला का नाम सूत्र बता रहे हैं। नाम भले ही अब कुल 8 बचे हों। परंतु 20 से अधिक दावेदार अभी भी अपने-अपने नामों को लेकर आशान्वित हैं। वे पूरे दावे से अपना नाम पैनल में होने की बात कह रहे हैं। बहरहाल, अब सभी नाम दिल्ली पहुंच चुके हैं। प्रदेश के कई जिलाध्यक्ष दोबारा मौका देने के लिए पूरा जोर लगाए हैं। इसका असर सागर में भी देखने को मिल सकता है। इस बीच सागर में आईटी की रेड एक दावेदार के घर पड़ने के बाद भी कई सवाल खड़े हुए हैं। रेड की वजह जो भी हो लेकिन उसकी टाइमिंग के बाद दावेदारों और उनके समर्थकों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।


