भोपाल में हुई पाम ऑयल कॉन्क्लेव 2025:जानकार बोले- सस्ता है इसलिए खराब है यह गलत धारणा, खराब कर दी गई इमेज

पाम ऑयल पर देश में चल रही गलतफहमियों को वैज्ञानिक तथ्यों से चुनौती देने की जरूरत है, क्योंकि भारत की खाद्य तेल सुरक्षा में पाम ऑयल की भूमिका बेहद अहम है। यह बात एशियन पाम ऑयल अलायंस (APOA) के सेक्रेटरी जनरल डॉ. सुरेश मोटवानी ने पाम ऑयल कॉन्क्लेव 2025 के दौरान कही। उन्होंने बताया कि संस्था विश्व स्तर पर छोटे किसानों के साथ विभिन्न फसलों में काम करती है। जिनमें पाम ऑयल भी एक महत्वपूर्ण फसल है। लेकिन, भारत में पाम ऑयल की इमेज अनावश्यक रूप से खराब कर दी गई है। डॉ. मोटवानी ने कहा कि लोगों को लगता है यह सस्ता है इसलिए अच्छा नहीं है। हेल्थ और पर्यावरण पर गलत आरोप लगाए जाते हैं। जबकि सच यह है कि पाम ऑयल की प्रति एकड़ पैदावार किसी भी अन्य तेल फसल की तुलना में 5-10 गुना अधिक है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का 60% आयात करता है। जिसमें पाम ऑयल की हिस्सेदारी 80% तक है। ऐसे में उपभोक्ताओं की पाम ऑयल के प्रति नापसंदगी खाद्य तेल बाजार को गहराई से प्रभावित कर सकती है। भारत सरकार का बड़ा दांव- 11 हजार करोड़ का पाम ऑयल मिशन
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए ऑयल पाम मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं इसे बढ़ावा दे रही है, तभी उपभोक्ता स्तर पर भ्रांतियां रोकनी होंगी। नहीं तो मिशन का लाभ पूरी तरह जनता तक नहीं पहुंच पाएगा। तेल सब अच्छे हैं, फर्क मात्रा और उपयोग का है
मोटवानी ने स्पष्ट कहा है कि तीनों तेल अच्छे हैं। कौन सा तेल कितना और कैसे उपयोग करते हैं, यह तय करता है कि वह शरीर के लिए कैसा है। डीप फ्राइंग में पाम ऑयल अधिक स्थिर और सुरक्षित माना है। जबकि किसी भी तेल को बार-बार गरम करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। उपभोक्ताओं की शंका पर उन्होंने कहा कि हम छिपाना नहीं चाहते। इसी कॉन्क्लेव में लगी प्रदर्शनी में 30 से ज्यादा ब्रांड गर्व से लिख रहे हैं कि पाम ऑयल का उपयोग किया है। यह हमारी कोशिश है कि दुविधा खत्म हो।

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