नागौर जोधपुर सीमा के ग्राम चाऊ देव में जसनाथजी महाराज की बाड़ी में स्थित तपस्वी तपानाथ जी महाराज मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय भागवत कथा का समापन विशाल धर्म सभा के साथ हुआ। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया गया। चालीस-पचास गांवों से उमड़ी भीड़ मथुरावासी जय किशन महाराज ने सात दिवस तक भक्तों को भागवत कथा का श्रवण करवाया। आस-पास के चालीस-पचास गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रोज कथा सुनने आते थे। बंधड़ा निवासी दीपा राम जांदू ने इन सभी भक्तों के लिए रहने व भोजन प्रसादी की उत्तम व्यवस्था की। जसनाथजी के 36 नियमों पर चलने का आह्वान अंतिम दिवस पर आयोजित धर्म सभा में विभिन्न बाड़ियों से पधारे महंत गणों ने गुरुदेव जसनाथजी महाराज के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। बालयोगी देवानाथ सिद्ध ने अपने उद्बोधन में भगवान शंकर का ध्यान लगाने और गौमाता की सेवा करने की बात कही। तपस्वी तपानाथ जी की बाड़ी के महंत रामनाथ ने बताया कि आज से 550 वर्ष पूर्व गुरुदेव जसनाथजी महाराज ने वेदों का निचोड़ सरल शब्दों में पिरोकर हमें 36 नियम दिए थे। उन्होंने जीवन शैली को पर्यावरण अनुकूल बनाने, अधिकाधिक जाल वृक्ष लगवाने तथा नशा मुक्त समाज बनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मान धर्म सभा के मुख्य अतिथि पद्मश्री हिम्मता राम भाम्भू ने पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में जसनाथजी महाराज के बताए रास्ते का जिक्र किया। श्री संस्थान द्वारा महंत रामनाथ को स्मृति पत्र, शॉल व साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। उनकी नियमित देखभाल से आज एक हज़ार पौधे पेड़ बने हैं। इसी कड़ी में सात लाख की लागत से पक्षीघर बनाने वाले मेहराम चौधरी को भी सम्मानित किया गया। भाम्भू ने कहा कि दो साल पहले पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में जो कार्य शुरू हुआ, वह आज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी अनुयायियों से हर रोज मंदिर जाने और प्रसाद रूपी चुग्गा साथ लेकर जाने का आग्रह किया, ताकि पक्षियों को भोजन मिलता रहे। उन्होंने वन्य जीवों के संरक्षण (रखत) की महत्ता पर भी जोर दिया, क्योंकि वे सबसे ज्यादा संकट में हैं। उन्होंने जन्म देने वाली मां , धरती मां, प्रकृति मां और गौ मां, इन चार माताओं की सेवा करने का संदेश दिया। गंगा सरोवर और मूर्ति स्थापना कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों ने कल्पवृक्ष की पूजा की और भगवान शंकर के जयकारों के साथ गंगा सरोवर व भगवान शंकर की मूर्ति की स्थापना की। आसुराम, रुघाराम, परमान राम, पुरखाराम व जोगाराम के परिवार ने तपस्वी पुरखनाथ जी महाराज के देवालय व भागवत कथा के लिए सात लाख से अधिक राशि का समर्पण किया। इस अवसर पर सिद्ध प्रहलाद नाथ ने दिव्य अग्नि नृत्य कर सभी भक्तों का मन मोह लिया। तपस्वी तपानाथजी बाड़ी का इतिहास उल्लेखनीय है कि चाऊ में स्थित तपस्वी तपानाथजी महाराज जसनाथ परम्परा के प्रमुख संत थे, जिन्होंने योग साधना से जीवित समाधि ली। उन्होंने अपनी तपस्या से एक ब्राह्मण जोड़े के लिए बाड़ी में ही गंगा प्रकट की थी और अनेक जाल वृक्ष लगाए थे। सिद्ध रुस्तम जैसे समकालीन सिद्ध पुरुषों ने अपने तप से औरंगजेब जैसे क्रूर शासक से भी जसनाथजी के 36 नियमों के प्रचार की लिखित अनुमति (ताम्रपात्र) प्राप्त की थी। इस कार्यक्रम में सिद्ध युवा महासभा अध्यक्ष मुन्ना नाथ साऊ, जायल नगरपालिका चेयरमैन प्रतिनिधि जगदीश कड़वासरा, महंत मोहन नाथ कूकना, जुगत नाथ कुकना, ईश्वर राम आंवलियासर, मेहराम चौधरी, दीपाराम जांदू सहित सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।


