भास्कर खास झारखंड की सभी 31 जेलों में कैदियों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच होगी। इसके लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच समिति बनाई गई है। समिति फोटो और वीडियो सहित विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। उसे कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं के महानिरीक्षक को सौंपेगी। हाईकोर्ट ने जेलों में जेलों में कैदियों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर चिंता जताते हुए कड़ी नाराजगी जताई थी। कैंटीन और खाने-पीने की व्यवस्था में सुधार करने का आदेश दिया था। इसके बाद जेल आईजी ने इसमें सुधार करने के लिए कमेटी बनाई। यह कमेटी सभी जेलों का भौतिक निरीक्षण करेगी। कैदियों के भोजन की गुणवत्ता, किचन संचालन ओर रसोईघर की स्वच्छता आदि की जांच कर रिपोर्ट बनाएगी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) ने 12 नवंबर से 29 नवंबर तक जेलों का निरीक्षण अभियान चलाया था। इस दौरान 200 सजायाफ्ता कैदी और 200 विचाराधीन बंदी से बातचीत की गई। कैदिया का कहना था कि भोजन काफी निम्न स्तर का होता है। रोटियां सख्त और बासी मिलती है। जब किसी अधिकारी का निरीक्षण होता है तो उसी दिन अच्छा भोजन परोसा जाता है। जेल मैनुअल में कैदियों को सप्ताह में तीन दिन नॉनवेज और शाकाहारियों के लिए पनीर, खीर और मिक्स वेजिटेबल देने का प्रावधान है। लेकिन ऐसा होता नहीं है। रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार के कैदियों ने तो यहां तक कहां था कि उन्हें ऐसा भोजन मिलता है, जिसे जानवर भी न खाए। मीडिया में यह रिपोर्ट आने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया। फिर सरकार को तत्काल इस व्यवस्था में सुधार करने का आदेश दिया। आईजी ने कहा-जेलों में नर्सों की प्रतिनियुक्ति करेंजेल आईजी ने गृह विभाग के प्रधान सचिव से जेलों में नर्सों की प्रतिनियुक्ति करने का अनुरोध किया है। सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि झारखंड हाईकोर्ट ने बंदियों के समुचित इलाज के लिए सभी पदों को भरने का निर्देश दिया है। वर्तमान में जेल में करीब 16,549 बंदी हैं। बीमार बंदियों की मौत होने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग शोकॉज करता है। जेल में नर्स न होने से बंदियों को 24 घंटे चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती। इसलिए तत्काल प्रतिनियुक्ति करें। अलग-अलग टीम जेलों की करेगी जांच पांच सदस्यीय कमेटी का नेतृत्व कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षणालय झारखंड के निदेशक (प्रशासन) मनोज कुमार करेंगे। सदस्य के रूप में अवर सचिव अरविंद कुमार, सहायक महानिरीक्षक (कारा) तुषार रंजन गुप्ता, बंदी कल्याण पदाधिकारी राम गोविंद पंडित और प्रोबेशन पदाधिकारी चंद्रमौली सिंह को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि वे अलग-अलग टीम बनाकर जेलों में जाएं। वहां की जांच करें। जितनी जल्दी हो सके, जेलों का निरीक्षण पूरा कर रिपोर्ट सौंपें, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।


