हनीट्रैप करने वाली ISI एजेंट को जासूस पहुंचाता था नंबर:वॉट्सऐप पर खूबसूरत तस्वीरें लगाकर बनाती थी शिकार, बाबाजी-वीरजी नाम से सेव मिले नंबर

श्रीगंगानगर से पकड़े गए जासूस प्रकाश ने ISI एजेंटों के नंबर बाबाजी, वीरजी, बाला वीरजी के नाम से सेव कर रखे थे। इंटेलिजेंस एजेंसियों ने मोबाइल खंगाला तो सेना की कई महत्वपूर्ण फोटो-वीडियो एजेंट को भेजे गए थे। जासूस लगातार एजेंटों से चैट करता था। भास्कर ने सूत्रों के हवाले से चैट के कुछ अंश भी जुटाए हैं। जासूस प्रकाश ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए 4 सिम (SIM) खरीदे थे। उन नंबरों पर ISI की महिला एजेंट OTP हासिल कर वॉट्सऐप चलाती थी। फिर उन्हीं भारतीय नंबरों से बॉर्डर एरिया में सेना के जवानों को हनीट्रैप का शिकार बनाती थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी प्रकाश ने राजस्थान और गुजरात के कई सैन्य ठिकानों की रेकी कर फोटो-वीडियो भेजे थे। जासूसी के बदले प्रकाश के एक बैंक खातों में लाखों रुपए के लेनदेन की पुष्टि हुई है। पढ़िए संडे बिग स्टोरी में… ISI एजेंट के नंबर बाबाजी, वीरजी, बाला वीरजी के नाम से थे सेव आरोपी प्रकाश सिंह ने तीन ISI एजेंट के नाम बाबाजी, वीरजी और बालावीरजी के नाम से सेव कर रखे थे। इन नंबरों से ही प्रकाश के पास कॉल आते थे। एजेंट के निर्देश मिलते ही प्रकाश तुरंत ही उस टास्क को पूरा करने में जुट जाता था। प्रकाश से सैन्य ठिकानों के फोटो-वीडियो मांगे जाते थे। आरोपी प्रकाश की ISI एजेंट से लंबी वॉट्सऐप चैट पकड़ी गई है। भास्कर को सूत्रों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उस चैट के कुछ अंश बताए हैं… ISI हैंडलर्स के लिए खरीदी भारतीय सिम पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहे एजेंट प्रकाश से इंटेलिजेंस एजेंसियों की सामूहिक पूछताछ में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। प्रकाश चंद पैसों का लालच देकर लोगों से डॉक्यूमेंट लेकर उनके नाम पर मोबाइल सिम खरीद लेता था। उन सिम को एक्टिवेट करवाकर, मोबाइल नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को देता था। पाकिस्तानी एजेंट उन नंबरों पर वॉट्सऐप चलाने के लिए OTP जेनरेट करते, जिसे प्रकाश हाथोंहाथ बता देता। ये वॉट्सऐप नंबर आईएसआई की महिला एजेंटों को सौंप दिए जाते थे। आशंका है कि महिला एजेंट इन एक्टिव वॉट्सऐप नंबरों पर इंडियन आर्मी की वर्दी में डीपी लगाकर बॉर्डर एरिया में सेना के जवानों को हनीट्रैप में इस्तेमाल करती थी। मोबाइल नंबर इंडियन होने के कारण किसी को शक भी नहीं होता था। 4 सिम खरीदीं, एक पाकिस्तान में एक्टिव, 2 अलग-अलग देशों में इस्तेमाल जांच टीमों को अभी तक आरोपी प्रकाश सिंह द्वारा एक्टिव कराए गए चार नंबरों की जानकारी मिली है। एक का उपयोग वह खुद कर रहा था, दूसरा नंबर पाकिस्तान में एक्टिव था। वहीं, दो अन्य नंबर दो अलग-अलग देशों में एक्टिव हैं। इन नंबरों पर चल रहे वॉट्सऐप से कितने लोगों को आईएसआई एजेंटों ने अपने जाल में फंसाया उसकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए एजेंसियों ने वॉट्सऐप चलाने वाली कंपनी से तीन मोबाइल नंबरों की हिस्ट्री मांगी है। हैंडलर्स से मिले निर्देश, राजस्थान-गुजरात के सैन्य ठिकानों तक गया पाकिस्तानी एजेंट प्रकाश को मनचाहे तरीके से इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बदले उसे पैसा भी दिया जाता था। मोबाइल की जब जांच की गई तो पता चला कि राजस्थान के अलवर, बीकानेर के खाजूवाला के अलावा प्रकाश पंजाब और गुजरात के कई आर्मी ठिकानों तक भी पहुंच गया था। वहां आर्मी कैंप, लोकेशन, सेना के मूवमेंट, सेना के प्रोजेक्ट जैसी जानकारियां भेज चुका था। नशे की लत थी, पैसों के लिए एजेंट बना इंटेलिजेंस अफसरों के अनुसार प्रकाश जानता था कि वह पाकिस्तानी एजेंटों को महत्वपूर्ण जानकारी दे रहा है। इससे देश को खतरा हो सकता है। लेकिन इसके बावजूद वह यह सब कर रहा था। उसे नशे की लत होने की जानकारी भी सामने आ रही है। फार्मेसी का स्टूडेंट रहा प्रकाश सिंह उर्फ बादल यह सब चंद पैसों के लालच में कर रहा था। आरोपी का एयरटेल बैंक में अकाउंट मिला है। प्रकाश सिंह के खाते में पिछले कुछ समय में करीब सवा लाख रुपए के लगभग भी पाकिस्तान और दूसरे देश से आया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से छठा पाक एजेंट गिरफ्तार आईजी इंटेलिजेंस प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से प्रकाश सिंह छठा पाक एजेंट है, जो पकड़ में आया है। 27 नवंबर को प्रकाश सिंह को श्रीगंगानगर में सेना के कैंट एरिया साधुवाली के आसपास संदिग्ध तौर पर देखा गया था। सूचना मिलने पर बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई कर उसे हिरासत में लिया। पुष्टि होने पर 1 दिसंबर को स्पेशल पुलिस स्टेशन जयपुर में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट 1923 के तहत मुकदमा दर्ज कर प्रकाश सिंह को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके मोबाइल फोन पर पाकिस्तान के वॉट्सऐप नंबरों से लगातार संपर्क में रहने की पुष्टि हुई। उन नंबरों पर आरोपी ने कई सेना से जुड़े कई फोटो, वीडियो भी भेज रखे थे। प्रकाश चैट के जरिए भी कई जानकारियां साझा कर रहा था। उसके मोबाइल से डिलीट मैसेज और फोटो-वीडियो रिकवर करने के लिए एफएसएल की मदद ली जा रही है। 13 साल से जुड़ा है ड्रग तस्करी से, डेढ़ साल पंजाब जेल में रहा जासूसी करने से पहले प्रकाश सिंह पाकिस्तान से आने वाली ड्रग को देश के अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करता था। ISI के जरिए ये ड्रग राजस्थान से जुड़े बॉर्डर पर ड्रोन से गिराई जाती थी। प्रकाश सिंह ड्रग तस्करी के इस मॉडल का मुख्य सरगना था। आरोपी ने 12वीं तक पढ़ाई की है और डी-फार्मा कोर्स भी किया है। कंप्यूटर हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर की भी अच्छी जानकारी रखता है। जांच में सामने आया कि प्रकाश सिंह पिछले 13 साल से इंटरनेशनल ड्रग तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा रहा है। साल 2012-13 में भी हेरोइन के साथ पकड़ा गया था। सितंबर 2014 तक पंजाब की जेल में रहा। इस दौरान वह अमृतसर के बड़े ड्रग स्मगलरों के लिए मीडिएटर का काम करता था। विशेष लोक अभियोजक सुदेश सतवान ने बताया कि प्रकाश सिंह का रिमांड 11 दिसंबर तक मिला है। फिरोजपुर पंजाब निवासी प्रकाश सिंह उर्फ बादल (34) को जांच टीम पंजाब लेकर गई है। पूछताछ में और भी खुलासे होने की संभावना है। …. पाक जासूस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… श्रीगंगानगर में पकड़ा गया पाकिस्तानी जासूस:ऑपरेशन सिंदूर से ISI के संपर्क में था; वॉट्सऐप पर भेज रहा था सेना से जुड़ी सूचनाएं राजस्थान पुलिस की CID इंटेलिजेंस विंग ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। सीआईडी ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए जासूसी करने वाले पंजाब के युवक को श्रीगंगानगर से गिरफ्तार किया है। पढ़िए पूरी खबर… जैसलमेर में बॉर्डर से पकड़ा गया पाकिस्तानी जासूस:ISI को भेज रहा था सेना से जुड़ी सूचनाएं; ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी दी थी जानकारियां राजस्थान की सीआईडी इंटेलिजेंस ने जैसलमेर में बॉर्डर से पाकिस्तानी जासूस हनीफ खान को गिरफ्तार किया है। हनीफ खान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को भारतीय सेना से जुड़ी सूचनाएं भेज रहा था। पढ़िए पूरी खबर…

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