मौसम विभाग:बनती-मिटती रहीं रूई जैसे बादलों की लकीरें, कड़ाके की सर्दी का इशारा

आसमान में शनिवार को रूई जैसे बादल आड़ी-तिरछी लकीरें बनाते रहे। इसके नजारे दोपहर बाद से देर शाम तक दिखते रहे। रात और दिन के तापमान में तीन गुना फासला रहा। अधिकतम तापमान बीते 24 घंटे में 0.4 डिग्री चढ़ा। फिर भी दिन सामान्य से 1 डिग्री ज्यादा ठंडा रहा। पारा 25 डिग्री दर्ज हुआ। इससे पहले इस दिसंबर में रात पहली बार सामान्य से नीचे चली गई। न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री फिसलकर 8.5 डिग्री पर सिमट आया। इस महीने इनका औसत क्रमश: 26 और 8.8 डिग्री सेल्सियस तय है। विभाग और विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम के मौजूदा रंग ज्यादा नहीं टिकेंगे। क्योंकि यह दो विक्षोभों का असर है, जो रविवार तक खत्म हो सकता है। फिर सर्दी और चेतेगी। बता दें, इससे पहले 16 और 17 नवंबर को रात का तापमान 8.5 डिग्री के निचले स्तर पर था। तब रात सामान्य 13 डिग्री के मुकाबले 4.5 डिग्री ज्यादा ठंडी थी। भास्कर एक्सपर्ट- दो सिस्टम टकराए, इसलिए सिरस बादल मौसम विशेषज्ञ प्रो. नरपतसिंह राठौड़ का कहना है कि एक तरफ अरब सागरीय विक्षोभ, दूसरी ओर दक्षिण-पूर्वी ईरान, बलूचिस्तान पर पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हुआ है। इसी से मेवाड़ सहित राजस्थान के अनेक भागों में सिरस क्लाउड्स या पक्षाभ बादलों से आकाश में ऐसी आकृतियां बनीं। मेवाड़ में दोपहर के समय ऐसा अद्भुत नजारा बना। ये धारीदार कपासीय बादल उत्तरी अरब सागर से आए हैं, जो 5 किमी की ऊंचाई तक बनते हैं। कहीं-कहीं बूंदाबांदी भी करवा सकते हैं। सिरस बादल ऊंचाई पर जमे बर्फ कणों से बने होते हैं। ये अक्सर आने वाले मौसमी बदलावों के पहले संकेत होते हैं। कभी-कभी केवल ऊपरी हवाओं की निशानी होते हैं। इनका मतलब यह नहीं होता कि तुरंत बारिश होगी। अगले 24 घंटे में मौसम साफ हो जाएगा।

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