प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय नौकरी करने का सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। फर्जी जाति प्रमाण पर नौकरी के मामले की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि 8 अभ्यार्थियों ने शिक्षा पिछड़ा वर्ग के कोटे से स्कॉलरशिप लेते हुए प्राप्त की और फर्जी प्रमाण पत्र से आदिवासी बन नौकरी हासिल की। सभी आरोपियों के संबंध में जानकारी एकत्र की जा रही है। आरटीआई एक्टिविस्ट गौरीशंकर राजपूत की शिकायत पर एसटीएफ ऐसे 26 अधिकारी और कर्मचारियों की जांच कर रही है। जांच में जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों की संख्या बढ़ रही है। जांच पूरी होने पर संख्या और बढ़ने की संभावना है। इनमें बिजली विभाग के अधिकारी, उद्यान विभाग के संयुक्त संचालक, शिक्षक, डॉक्टर, आरक्षक, सूबेदार, एसआई, न्यायालय के स्टेनो शामिल हैं। इन सभी के अनुसूचित जाति जाति के जो प्रमाण पत्र नौकरी के दौरान लगाए गए हैं वह संबंधित कार्यालयों से जारी ही नहीं किए गए हैं। जांच के दायरे में यह 26 अधिकारी और कर्मचारी डॉ. दिनेश माझी जीआरएमसी ग्वालियर
डॉ. रजनीश जीआरएमसी ग्वालियर
डॉ. सीमा माझी जीआरएमसी ग्वालियर
डॉ. विनोद बाथम जीआरएमसी ग्वालियर
रेखा बाथम, शिक्षक ग्वालियर
सुनीता रावत शिक्षक ग्वालियर
सरला माझी शिक्षक डबरा
राजेश केवट शिक्षक डबरा
कुसुम मांझी शिक्षक डबरा
जवाहर सिंह केवट शिक्षक डबरा
सीताराम केवट शिक्षक डबरा
दशरथ मीणा शिक्षक गुना
महेंद्र बाथम फर्मासिस्ट शिवपुरी
हाकिम बाथम ईई बिजली विभाग बैतूल,
मनीष गौतम महाप्रबंधक बिजली विभाग बैतूल
यश कुमार सिंह जेडी उद्यान विभाग दमोह
हेमंत बाथम आरक्षक गुना
बाबूलाल रावत शिक्षक ग्वालियर
अनिल बाथम सूबेदार यातायात श्योपुर
नाहर सिंह आरक्षक शिवपुरी
लोकेंद्र सिंह आरक्षक 25वीं बटालियन भोपाल
देवीलाल ढीमर स्टेनो न्यायालय राजगढ़
भागीरथी मांझी स्टेनो न्यायालय गुना
अनुपम मांझी स्टेनो न्यायालय गुना
उपनिरीक्षक गीतिका बाथम भोपाल
महेश बाथम आरक्षक शिवपुरी न्यायालय में पक्ष रखा अब सुनवाई 12 को
एसटीएफ में एफआईआर होने के बाद आरोपी पक्ष ने न्यायालय में भी याचिका लगा दी है। इसमें जाति निर्धारण में पेच का मुद्दा रखा गया है। इस मामले में पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए बताया है कि एसटीएफ ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवा कर नौकरी करने का मामला दर्ज किया है। जिन प्रमाण पत्रों पर अभ्यार्थी नौकरी कर रहे वह संबंधित कार्यालयों से जारी ही नहीं किए गए हैं। प्रमाण पत्र जारी ही नहीं हुए तो इनका सत्यापन भी गिरोह ने फर्जी तरीके से कराया। एसटीएफ में सत्यापन करने व कराने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया जाएगा, इस सूची में अभी और अधिक संख्या में नाम बढ़ेंगे। एसटीएफ की विवेचना पर रोक नहीं है वह चल रही है, केवल फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक है। अनुसूचित जनजाति के कोटे में गड़बड़ी उजागर
फर्जी प्रमाण पत्र से आदिवासी (अनुसूचित जन जाति) बनकर नौकरी करने के मामले में जांच हो रही है। इसमें कुछ लोगों के संबंध में यह भी पता चला है कि पढ़ाई के समय वह अन्य पिछड़ा वर्ग जाति के प्रमाण पत्र पर सरकारी लाभ ले रहे थे। कुछ ने सामान्य वर्ग से शिक्षा ली है। जांच अभी जारी है। न्यायालय में भी पुलिस ने अपना पक्ष रख दिया है, विवेचना पर कोई रोक नहीं है।
-राजेश भदौरिया, एसपी एसटीएफ एक्सपर्ट – मुनीष राजौरिया, सेवानिवृत्त डीएसपी आदिवासी वर्ग के लिए आर्हता कम इसलिए गड़बड़ी ज्यादा
आदिवासी(अनुसूचित जन जाति) वर्ग के लिए आरक्षित पदों के लिए शिक्षा में जो आर्हताएं निर्धारित रहती हैं वह पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) की तुलना में कम होती है। ऐसी स्थिति में ओबीसी वर्ग के जिन अभ्यार्थियों को उस पद पर खुद के कोटे से उस पद पर चयन की संभावना कम होती है, उनमें से कुछ अभ्यार्थी इस प्रकार की गड़बड़ी करते हैं। अभ्यार्थी अनुसूचित जन जाति(आदिवासी) के फर्जी कूट रचित प्रमाण पत्र का उपयोग कर आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित पदों के लिए आवेदन कर नौकरी ले लेते हैं। यह काम बिना चयन समिति में शामिल अधिकारी और कर्मचारी के संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में आदिवासी वर्ग के आवेदकों को नौकरी नहीं मिल पाती और वह अपने हक से वंचित रह जाते हैं।


