छतरपुर जिले के राजनगर जनपद से भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां के इमलाहा गांव में किसान के कुएं के निर्माण के लिए आए सरकारी पैसों में हेरफेर की शिकायत की गई है। पीड़ित किसान ने पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर मिलीभगत कर फर्जी तरीके से राशि निकालने का गंभीर आरोप लगाया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम इमलाहा के रहने वाले किसान भोला कुशवाहा को साल 2021 में ‘कपिलधारा कूप योजना’ के तहत सरकारी कुआं मंजूर हुआ था। किन्हीं कारणों से उस समय काम शुरू नहीं हो सका। हाल ही में जब किसान ने खुद कर्ज लेकर और मजदूरों को बुलाकर काम शुरू करवाया, तो पता चला कि उनके हक का पैसा पहले ही निकाला जा चुका है। किसान का आरोप है कि सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने मिलकर फर्जी बिलों के जरिए पैसे हड़प लिए। फर्जी खातों में ट्रांसफर हुई राशि किसान भोला कुशवाहा के अनुसार, कुल 69 हजार रुपए का फर्जी भुगतान किया गया है। इसमें से मजदूरी के नाम पर 11 हजार रुपए और कारीगर (मिस्त्री) के बिल के नाम पर 58 हजार रुपए फर्जी खातों में डालकर निकाल लिए गए। किसान का कहना है कि उन्होंने खुद कर्ज लेकर मजदूरों को भुगतान किया है, जबकि सरकारी पैसा कागजों पर खर्च दिखा दिया गया। अब मिस्त्री और मजदूर किसान से पैसे मांग रहे हैं, जिससे वह भारी तनाव में हैं। रिश्वत लेने का भी आरोप किसान ने अपनी शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि पंचायत के पदाधिकारियों ने इस योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पहले ही 20 हजार रुपए की रिश्वत भी ली थी। किसान ने अब जनपद पंचायत सीईओ को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। रोजगार सहायक ने कहा- आरोप झूठे हैं दूसरी तरफ, रोजगार सहायक रमेश प्रजापति ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने 2 मार्च 2024 को ही कार्यभार संभाला है और उनकी आईडी भी नवंबर में बनी है। पुराने बिल पूर्व रोजगार सहायक मुकेश पांडेय की आईडी से लगाए गए हैं। उन्होंने इस मामले में अपनी और सचिव की किसी भी भूमिका से इनकार किया है। प्रशासन ने दिया जांच का भरोसा राजनगर जनपद सीईओ राकेश शुक्ला ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि किसान का आवेदन मिल चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


