सागर में पिता का निधन होने पर बेटियों ने मुखाग्नि दी। वे अंतिम यात्रा में शामिल हुईं और मुक्तिधाम पहुंची। जहां रीति-रिवाज के साथ पिता को अंतिम विदाई दी। यह नजारा देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखे नम हो गईं। दरअसल, सागर नगर निगम के सफाईकर्मी डालचंद वाल्मीकि को 30 नवंबर को बुखार आया। परिवार वालों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जहां आराम नहीं लगने पर उन्हें परिवार के लोग नागपुर लेकर गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। रविवार को शव सागर लाया गया। सागर में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। यात्रा में डालचंद की बेटियां शामिल हुई। उन्होंने पिता की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट पहुंचकर चिता को मुखाग्नि दी।
मृतक का बेटा नहीं, बेटियों ने निभाया फर्ज
दरअसल, मृतक डालचंद वाल्मीकि की 7 बेटियां हैं। उनका बेटा नहीं है। डालचंद नगर निगम में अस्थाई सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे। बीमार होने के बाद से उनका इलाज चल रहा था। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटा नहीं होने पर बेटियों ने पिता को अंतिम विदाई देकर अपना फर्ज निभाया। बेटी साधना वाल्मीकि ने बताया कि पिता को बुखार आया था। जिसके बाद गले में छाले हो गए। तबीयत खराब होने पर नागपुर इलाज के लिए गए। लेकिन वहां से लौटकर नहीं आए। हम सात बहन हैं। कोई भाई नहीं है। परिवार का पालन-पोषण पिता ही करते थे। अब कोई कमाने वाला नहीं है। परिजन और समाज के लोगों ने डालचंद के परिवार की मदद करने की मांग प्रशासन से की है।


