राजसमंद शहर में पंचरत्न कॉम्प्लेक्स में इन दिनों रामलीला का मंचन किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए रोज बड़ी संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं। सातवें दिन की रामलीला में भगवान श्रीराम माता सबरी के आश्रम पधारे, जहां उन्होंने प्रेम और भक्ति के प्रतीक स्वरूप सबरी द्वारा समर्पित झूठे बेर ग्रहण किए। इस दौरान श्रीराम ने नौ प्रकार की भक्तियों का वर्णन कर समाज को भक्ति का सार बताया। श्रीराम व हनुमान का मिलन इसके बाद कथा आगे बढ़ी और दर्शकों ने श्रीराम व हनुमान के प्रथम मिलन का अद्भुत दृश्य देखा। मंचन में हनुमान की भक्ति और श्रीराम की करुणा का भावपूर्ण प्रदर्शन किया गया। इसके बाद कलाकारों ने राम -सुग्रीव मित्रता, बाली वध और किष्किंधा के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा। रामलीला के संचालक पंडित अशोक उपाध्याय के अनुसार रामलीला मात्र मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों का संगम है। सबरी प्रसंग के दौरान दर्शक भावविभोर हो उठे और श्रीराम के संदेश “जात-पात नहीं, भाव ही सर्वोपरि है” को आत्मसात किया।


