बेटे की मौत पर मिली राशि विवाह में खर्च की:कोर्ट ने कहा-मुआवजा राशि की हुई शुद्ध बर्बादी,अन्य खर्चों के लिए एफडी तोड़ने की याचिका खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक मामले में सुनवाई करते हुए मृतक पुत्र के मुआवजे की राशि से दूसरे बेटे की शादी में खर्च किए गए पैसों पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बेटे की मौत पर मिले मुआवजे को विवाह जैसे अवसरों पर उड़ाना न सिर्फ गलत है, बल्कि पैसों की सीधी बर्बादी है। अदालत ने यह भी हैरानी जताई कि 8 लाख रुपए में से 6 लाख रुपए शादी में खर्च कर दिए गए। कोर्ट ने दंपत्ति की वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने बचे हुए 2 लाख रुपए फिक्स डिपॉजिट से निकालने की अनुमति मांगी थी। मुआवजे की रकम का हुआ दुरुपयोग जानकारी के अनुसार सागर निवासी नीरज की 26 फरवरी 2020 को भोपाल-बिलासपुर एक्सप्रेस से सफर के दौरान गिरने से मौत हो गई थी। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल ने दिसंबर 2021 में उसके माता-पिता को 8 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया था। 28 मार्च 2024 को नीरज के छोटे भाई की शादी हुई, जिसके लिए परिवार ने मुआवजे में मिले 8 में से 6 लाख रुपए खर्च कर दिए। शेष 2 लाख रुपए मृतक की मां राधा बाई के नाम से एफडी कराए गए। इन्हीं पैसों को तीसरे बेटे की शादी और घरेलू खर्चों के लिए रिलीज कराने की मांग करते हुए दंपत्ति सुजान सिंह और राधा बाई ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने जताई नाराजगी सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि विवाह के खर्च के बाद दावेदारों के पास पैसे नहीं बचे और जिस बेटे की शादी हुई है वह बेरोजगार है, इसलिए खर्चों के लिए एफडी तोड़ने की जरूरत है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि मुआवजे की रकम मृतक की क्षति की भरपाई के लिए दी जाती है न कि समारोहों में खर्च करने के लिए। अदालत ने इस व्यवहार को वित्तीय अपरिपक्वता और फिजूलखर्ची का उदाहरण बताते हुए याचिका खारिज कर दी। एक पारिवारिक मामले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि बेटे की मौत से मिला मुआवजा के रुपए दूसरे बेटे की शादी में उड़ना यह ना सिर्फ गलत है,बल्कि पैसों की शुद्ध बर्बादी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी हैरानी जताई कि मुआवजे में मिले 8 में से 6 लाख रुपए खर्च कर दिए गए। कोर्ट ने कहा कि मुआवजे की राशि इसलिए नहीं दी गई कि शादी-समारोहों में पानी की तरह पैसा बहाया जाए। कोर्ट ने बचे हुए रुपए निकालने वाली दंपत्ति की याचिका को खारिज कर दिया है। दरअसल सागर में रहने वाले नीरज की 26 फरवरी 2020 को सागर स्टेशन पर भोपाल-बिलासपुर एक्सप्रेस ट्रेन से सफर के दौरान गिरने से मौत हो गई थी। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल भोपाल ने दिसंबर 2021 को 8 लाख रुपए का मुआवजा मृतक के माता-पिता को देने के लिए आदेश दिए थे। 28-3-2024 को नीरज के छोटे भाई की सागर में शादी हुई तो परिवार वालों ने मुआवजे में मिले 6 लाख रुपए शादी में खर्च कर दिए। जबकि बाकी के दो लाख रुपए मृतक की मां राधा बाई के नाम से बैंक में एफडी कर दी गई, जिसे रिलीज कराने के लिए सागर में रहने वाले सुजान सिंह और उनकी पत्नी राधा बाई ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, कि बचे हुए दो लाख रुपए तीसरे बेटे की शादी के लिए निकालना चाहते है। हाईकोर्ट को बताया गया कि विवाह समारोहों में 6 लाख रुपए खर्च कर दिए गए है, और अब दावेदारों के पास कुछ भी नहीं बचा है, और जिस बेटे की शादी हुई है, वह बेरोजगार है और उसके रखरखाव और घरेलू खर्चों के लिए जमा राशि की आवश्यकता है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यह स्पष्ट रूप से वित्तीय अपरिपक्कता और मुआवजे की की राशि की फिजूलखर्ची का मामला है। एक बेटे की मौत पर मिली मुआवजे की रकम दूसरे बेटे की शादी में उड़ना सबसे खराब उदाहरण है।

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