जयपुर-सवाई माधोपुर के बीच मेमो ट्रेन चलाने की मांग:छोटे स्टेशनों के लिए एक ही ट्रेन होने से जोर पकड़ने लगी मांग

जयपुर-सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर पिछले कई सालों से कोई शटल ट्रेन नहीं चल पाई है। वहीं इस मार्ग पर किसी मेमो ट्रेन का संचालन भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में इस मार्ग पर यात्रा करने वाले हजारों लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर पड़ने वाले छोटे स्टेशनों पर तो सुबह एवं शाम के समय केवल एक ट्रेन ही उपलब्ध है, जिसके चलते आवागमन में उन्हें सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। जयपुर-सवाई माधोपुर रेल मार्ग पर जयपुर जाने के लिए सुबह के समय केवल भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस ट्रेन उपलब्ध है। साथ ही जयपुर से सवाई माधोपुर आने के लिए जयपुर बयाना ही एकमात्र ट्रेन है तथा शाम के समय भी यही व्यवस्था है। इसके अलावा और कोई सवारी गाड़ी इस मार्ग पर नहीं चलने से हजारों यात्रियों को परेशानी हो रही है। पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया को इस मामले में कई बार लोगों द्वारा अवगत कराया गया था। जिस पर उन्होंने कई बार शटल या मेमो ट्रेन चलाये जाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी इस मार्ग पर पिछले कई सालों से कोई भी नई सवारी गाड़ी या फिर मेमो गाड़ी नहीं चलाई गई है। इसके अलावा कोटा से सवाई माधोपुर एवं जयपुर से फुलेरा एवं दौसा मार्ग पर सवारी गाड़ी चलाई जा चुकी है। जिसके चलते इस मार्ग पर यात्रा करने वाले लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इस मार्ग पर चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन तो एक या दो स्टेशनों पर ही रुकती है। अन्य स्टेशनों पर ठहराव के लिए कोई सवारी गाड़ी नहीं होने से सभी परेशान है। ग्रामीणों ने रेलवे से नई टाइम टेबल बनाने से पूर्व शटल या फिर मेमो ट्रेन इस मार्ग पर चलाई जाने का आग्रह किया है। लोगों की सुविधा के लिए चलाई जाए मेमो ट्रेन वहीं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रेमप्रकाश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में पर्यटन के चार बड़े केंद्र और एक विश्वविद्यालय मौजूद है। ऐसे में यहां प्राथमिकता से मेमो ट्रेन की आवश्यकता है । सवाई माधोपुर में रणथंभौर नेशनल पार्क और त्रिनेत्र गणेश मंदिर के लिए पब्लिक आती है तो वहीं चौथ का बरवाड़ा में भारत का एक मात्र चौथ माता मंदिर स्थित है। जबकि शिवाड़ में भारत का अंतिम और राजस्थान का एक मात्र ज्योतिर्लिंग श्रीघुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग मन्दिर स्थित है। निवाई वनस्थली में वनस्थली विद्या पीठ जैसा बड़ा विश्वविद्यालय मौजूद है। इटावा बालाजी के आने वाली हजारो सवारियां भी इन्ही ट्रेनों पर निर्भर है। ऐसे में लोगों की सुविधा के लिए एक मेमो ट्रैन की आवश्यकता है।

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