रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने मऊगंज जिले में केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय की स्थापना की मांग लोकसभा में उठाई। उन्होंने शून्यकाल के दौरान जिले में अच्छे शिक्षा संस्थानों की कमी का मुद्दा उठाया। सांसद मिश्रा ने सदन में कहा कि मऊगंज के बच्चों के लिए कोई श्रेष्ठ विद्यालय नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा के अभाव में यहां के बच्चे पीछे न रह जाएं, इसलिए इन विद्यालयों की स्थापना जरुरी है। बच्चों के लिए शिक्षा लेना बना चुनौती सांसद मिश्रा ने सदन को मऊगंज जिले की भौगोलिक स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र पहाड़ी और जंगल क्षेत्र से घिरा है, जहां दूरदराज के ग्रामीण और जनजातीय बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा लेना एक बड़ी चुनौती है। जिले में केंद्रीय या नवोदय विद्यालय न होने के कारण हजारों छात्रों को रीवा, सतना और दूसरे शहरों में पलायन करना पड़ता है। इससे माता-पिता पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और बच्चों की शिक्षा में रुकावट होती है। राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान खोले जाएं सांसद ने शिक्षा मंत्री से निवेदन किया कि मऊगंज क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यहां राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान खोले जाएं। उन्होंने कहा, “मऊगंज जिले की आबादी पहाड़ी व जंगली इलाके में निवास करती है। यहां अच्छे विद्यालयों की बहुत जरूरत है। अतः मंत्री जी कृपया एक नवोदय विद्यालय और एक केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की स्वीकृति प्रदान करें।” सांसद मिश्रा की इस मांग को सदन में गंभीरता से सुना गया। कई सदस्यों और मंत्री ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा में यह मुद्दा उठने से मऊगंज में केंद्रीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना की संभावनाएं बढ़ गई हैं। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो मऊगंज जिले को पहली बार दो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान—केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय—मिलेंगे। इससे जिले के शैक्षिक स्तर में महत्वपूर्ण सुधार आने की उम्मीद है।


