गुड़ी-सरमेश्वर रेंज का वह जंगल, जो 7 माह पहले अतिक्रमण के कारण दम तोड़ रहा था, अब फिर से हरा-भरा हो गया है। जहां खेत दिखाई देते थे, वहां 4–5 फीट ऊंचे पौधे हवा के साथ लहरा रहे हैं। इस जमीन को छुड़ाकर मिले फायदे सिर्फ हरियाली तक सीमित नहीं। अब गुड़ी और आसपास के गांवों के कुएं व तालाबों का जलस्तर बढ़ने लगा है। ग्रामीण इसे खेती सुधारने के लिए वरदान मान रहे हैं। क्योंकि जब अतिक्रमण मुक्त कराया गया तब खंती और गड्ढे खोदे गए, बारिश में इनमें पानी भरा जो आज भी है। डीएफओ राकेश कुमार डामौर ने बताया गुड़ी रेंज में 16 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वन से लगे 15 गांवों के अतिक्रमणकारियों ने 3 हजार हेक्टेयर वन पर कब्जा किया था। दिसंबर 2024 से यहां अतिक्रमण मुहिम शुरू की जो अप्रैल तक सतत चली। तब जाकर गुड़ी और सरमेश्वर की 2130 हेक्टेयर जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराया। अतिक्रमणकारियों ने यहां खेत बना डाले थे। उन्हें फिर से सुरक्षित रखने और हरा-भरा करने के लिए अतिक्रमण रोधी खंतियां खुदवाई गई। बीज फेंके गए। प्लांटेशन किया और फिर उसकी सुरक्षा के लिए भी टीमें जंगल में गश्त करती रहीं। तब जाकर 6 माह में फिर से जंगल पनप रहा है। कुमठा व टाकलखेड़ा इलाके में तो पेड़-पौधे 4 फीट तक हो चुके हैं।


