झारखंड हाईकोर्ट ने इंजीनियरिंग सर्विस रूल्स -2016 को लागू कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से नए नियम को मंजूरी दिलाने के लिए चार सप्ताह का समय देने की मांग की गई। अदालत ने मांग को खारिज करते हुए दो सप्ताह के अंदर संशोधित नियमों को अंतिम रूप देकर पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि निर्धारित समय में नियम को अंतिम रूप नहीं दिया गया तो संबंधित विभाग के सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। इससे पूर्व सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि 2016 के बाद से भर्ती-प्रमोशन के स्पष्ट नियम न होने से इंजीनियरों की नियुक्ति और प्रोन्नति लगभग ठप पड़ी रही है। ऐसे में बिना नियम के विभाग कैसे चल रहा है। अदालत ने कहा कि यह घोर सुस्ती और टालमटोल की प्रवृति है। अदालत ने कहा कि आमतौर पर न्यायालय राज्य को नियम बनाने का आदेश नहीं देता, यह सरकार की नीति-संवैधानिक विवेकाधिकार का क्षेत्र माना जाता है। लेकिन जब नियमों की अनदेखी एवं विलंब की वजह से इंजीनियरों के अधिकार वर्षों तक प्रभावित हों और अदालत के समक्ष लगातार आश्वासन देकर भी पालन न हो, तो न्यायालय को अपने संवैधानिक अधिकार (अनुच्छेद 226) का सक्रिय प्रयोग करना ही होगा। अदालत ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर को निर्धारित की है।


